हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” तीन मूर्ख बदमाश ” यह एक Funny Story है। अगर आपको Short Funny Stories, Comedy Funny Stories या Majedar Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।
एक गांव में जग्गू, कालिया और गोपी नाम के तीन बिगड़ैल आवारा युवक रहा करते थे। वो तीनों गांव में बनी हुई चाय की दुकान पर बैठे हुए चाय पी रहे थे।
जग्गू, “ओ भाई और! सुबह से मेरा सातवां कप चाय का हो गया, साला फील ही नहीं आ रहा चाय पीने का आज।”
कालिया, “अरे! टेंशन क्यों ले रहा भाई हैं?”
कालिया, “अरे चाचा! एक रापचिक सा अदरक मार के चाय बना दे और।”
गोपी, “अरे नहीं नहीं भैया ओ! मेरे कप में तो चाय पत्ती ठोक के और चीनी रोक के और हां मलाई कप पे परोस के, समझे ना?”
तभी चाय वाला गुस्से से उन तीनों से बोला।
चाय वाला, “तीनों के तीनों यहां से तीतर हो जाओ, बता रहा हूं हां। सुबह से तीनों ने मिलकर 20 कप चाय पी ली है और पैसे का नाम तक नहीं दिख रहा।
तुम तीनों आपस में मिलकर 300 का काम भी नहीं करते मगर खर्च तुम्हारे टाटा बिरला से भी ज्यादा है हां”
कालिया, “अबे ओ अबे! मुंह बंद कर बे। अबे मेहनत भी करते हैं हम तीनों समझा”
चाय वाला, “कौन सी, कौन सी मेहनत हैं कहां की मेहनत? पूरा दिन लूर लूर करवा लो हैं।कभी इस चौराहे पे तो कभी उस पे”
जग्गू, “अबे तो क्या उसमें कौन सी कम मेहनत है बे? तुम कर सकते हो क्या हैं”
चाय वाला, “तुम लोगों की बकवास अब नहीं चलने वाली मेरे आगे, समझे? बहुत हो गया, सीधे से बताओ मेरा पैसा कब दे रहे हो?”
गोपी, “अबे पिछली बार की तरह इस बार भी तेरे पैसे दे देंगे। क्यों इतनी देर से कुत्ते की तरह भौक रहा है हैं?”
चाय वाला, “भौक नहीं रहा, सही कह रहा हूं।”
तभी जग्गू गुस्सा होकर उठ खड़ा हुआ और चाय वाले की ओर देखकर बोला।
जग्गू, “देख भई ओ चाय वाले! हम तीनों एक योजना बना रहे हैं समझा? और बहुत जल्दी उस योजना में हम सफल हो जाएंगे।
उसके बाद तुझे अंदाजा भी नहीं है कि हम तीनों कितने अमीर हो जाएंगे? इसलिए हमसे अभी से तमीज से बात करना शुरू कर दे।”
चाय वाला, “दिन में मुंगेरी लाल के सपने देखना छोड़ दो तुम तीनों, समझे? तुम तीनों से कुछ नहीं होने वाला। तुम तीनों धरती पर बोझ हो बोझ”
चाय वाले की बात सुनकर तीनों दोस्तों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने मिलकर चाय वाले की बुरी तरह से पिटाई कर दी और वहां से चले गए।
चाय वाला, “यह अजीब दादागिरी है। एक तो मेरे पैसे भी नहीं दे रहे ऊपर से मार कर और चले गए। मैं चुप नहीं बैठूंगा। मुखिया जी से इन तीनों की शिकायत जरूर करूंगा।”
वो तीनों मुखिया के खेत में जाकर बैठ गए।
गोपी, “अरे जग्गू! वैसे हम तीनों कौन सी योजना बना रहे थे। तुमने तो बताया नहीं हमें।”
जग्गू, “अरे! मैं उसी योजना की बात कर रहा था जिसके बारे में कल हम तीनों ने आपस में मिलकर चर्चा की थी।”
तीन मूर्ख बदमाश | TEEN MURKH BADMASH | Funny Kahani | Comedy Story | Funny Stories in Hindi
गोपी, “अच्छा अच्छा… समझ गया। तू उस योजना की बात कर रहा है जिस योजना के तहत हम तीनों में से कोई एक जो है गांव के मुखिया की बेटी झुमरी को अपने प्यार के झांसे में लेगा और उससे शादी कर लेगा, सही ना?”
कालिया, “और शादी के बाद वो भी मुखिया की सारी संपत्ति का मालिक हो जाएगा और फिर हम दोनों दोस्त भी उसके घर पर ही पड़े रहेंगे। अरे वाह”
जग्गू, “वह सब तो ठीक है लेकिन मुखिया की बेटी झुमरी तो हम तीनों को घास तक नहीं डालती।”
कालिया, “ओ याद है जग्गू ओ! पिछली बार तूने उसको आई लव यू बोल दिया था और उसके बाद फिर मुखिया अपने आदमियों को लेकर तेरे घर पर पहुंच गया था और लकड़ियों से तेरे शरीर को तोड़ दिया था।”
गोपी, “हां मुझे याद आ गया उस वक्त जग्गू की चीख पूरे गांव में गूंज रही थी। सारा गांव इस पर हंस रहा था।”
गोपी और कालिया की बात सुनकर जग्गू गुस्सा हो गया।
जग्गू, “अरे! हां ओ, अब ज्यादा भावनाओं में बहने की जरूरत नहीं है, समझा? कम से कम मैंने हिम्मत तो की थी भैया। तुम दोनों निकम में तो इतनी हिम्मत भी नहीं कर पाए थे”
कालिया, “हां भैया हां, बड़ी बहादुरी का काम किया था तूने। लकड़ियों के निशान जो है अभी भी तेरे शरीर पर है।”
गोपी, “कालिया भाई, जग्गू भाई बताते नहीं है इनका शरीर आज भी दुखता है।”
इतना कहकर वो दोनों जग्गू का मजाक उड़ाने वाले अंदाज में हसने लगे।
जग्गू, “ओ बस बस हो, अब हंसना बंद करो, समझे?”
साधू, “तुम तीनों धरती पर बोझ ही नहीं बल्कि कलंक की तरह हो। आपस में गहरे दोस्त होने के बावजूद भी एक दूसरे का मजाक उड़ाते हो।”
उन तीनों ने देखा कि उनके सामने एक साधु खड़ा हुआ उन्हें गुस्से भरी नजरों से देख रहा था।
जग्गू, “अबे ओ! यह मेरे दोस्त हैं। यह मेरा मजाक उड़ायें या मुझे मारे पीटे अबे तू कौन होता है बे हमें ज्ञान देने वाला?”
साधु, “मूर्ख तुझे बात करने की भी तमीज नहीं। तू जानता नहीं, तू किससे बात कर रहा है?”
कालिया, “ओ हां हां ओ भैया! जानते हैं हम जानते हैं, समझा? हम एक भिखारी से बात कर रहे हैं जो खुद तो भीख मांगकर अपना पेट भरता है और मुफ्त का ज्ञान पेलता है।”
साधु, “अरे! मैं कोई भिखारी नहीं बल्कि एक साधु हूं। एक ऐसा साधु जो किसी को भी चुटकियों में अपने मंत्रों की शक्ति से भस्म कर सकता है।”
जग्गू, “अच्छा… अगर ऐसी बात है तो फिर हमें भस्म करके दिखा।”
साधु, “अभी नहीं कर सकता क्योंकि अभी दोपहर का समय है… मेरी शक्तियां रात में अधिक बलवान हो जाती हैं।”
जग्गू, “अबे! फिर तो तेरे मंत्र किसी काम के नहीं साधु। इसका मतलब तो यह है कि दिन में तुझे कोई भी घंटे की तरह बजा देगा और तू रात होने का इंतजार करता रहेगा… कि कब रात हो और कब तेरे मंत्र शक्तिशाली हों?”
इतना कहकर जग्गू और उसके दोनों दोस्त साधु का मजाक उड़ाने वाले अंदाज में हंसने लगे। तभी अचानक उन तीनों की आंखों के सामने वह साधु गायब हो गया।
जग्गू, “अबे! अबे यह कैसे हुआ बे? यह गायब कैसे हो गया?”
कालिया, “ओ यार! मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा बे।”
तीन मूर्ख बदमाश | TEEN MURKH BADMASH | Funny Kahani | Comedy Story | Funny Stories in Hindi
गोपी, “मुझे लगता है कि हमने फिर से भारी गलती कर दी यार। यह तो वाकई बहुत पहुंचा हुआ साधु था… कहीं रात के समय सोते हुए हमें भस्म ना कर दे यार यह?”
तभी उन तीनों के कानों में साधु के हंसने की आवाज टकराई। अचानक साधु उन सबके सामने आ गया।
साधु, “क्यों? हो गई ना तुम तीनों की सिट्टी-पिट्टी गुम?”
वो तीनों दौड़ते हुए साधु के पैरों पर गिर गए।
जग्गू, “हमें माफ कर दो साधु जी! हमसे पहचानने में भूल हो गई।”
कालिया, “इसमें हमारी कोई गलती नहीं साधु महाराज। यह हमारी फूटी किस्मत का ही कमाल है कि हम जो है ना चाहते हुए भी उल्टे-सीधे काम कर देते हैं।”
गोपी, “जग्गू भाई और कालिया भाई जो है बिल्कुल सही कह रहे हैं साधु महाराज, हमें क्षमा कर दो।”
साधु, “बस बस… अब और ज्यादा नौटंकी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मैं एक मजाकिया साधु हूं, मैंने तुम तीनों की बात का बुरा नहीं माना। जाओ, मैंने तुम तीनों को माफ किया।”
जग्गू, “ऐसे नहीं साधु महाराज! हम तीनों को भी गायब होने की ऐसी कोई शक्ति दे दो, तभी हम तीनों समझेंगे कि हमारे साधु महाराज ने जो है हमें क्षमा कर दिया है।”
जग्गू की बात सुनकर साधु जोर-जोर से हंसते हुए बोला।
साधु, “तुम तीनों चतुर मूर्ख हो।”
जग्गू, “चतुर मूर्ख? अबे! यह किस तरह का शब्द है साधु महाराज? या तो चतुर हो सकता है या मूर्ख हो सकता है।”
गोपी, “हमारी भी कुछ समझ में नहीं आया साधु महाराज।”
साधु, “आज मेरा मूड बहुत ज्यादा अच्छा है चतुर मूर्खों! इसलिए तुम्हें यह समझाने का समय नहीं है।
लेकिन फिर भी तुम्हारे दोस्त ने जो शक्ति मांगी है, वह शक्ति मैं तुम्हें देने के लिए तैयार हूं।”
साधु की बात सुनकर वह तीनों दोस्त खुश होते हुए उठ खड़े हुए। साधु उन तीनों की ओर देखते हुए बोला।
साधु, “मैं तुम्हें एक मंत्र बताता हूं। जब भी तुम तीनों एक साथ यह मंत्र पढ़ोगे, तुम तीनों लोगों की नजरों से ओझल हो जाओगे… तुम्हें कोई नहीं देख सकेगा।”
जग्गू, “साधु महाराज! तो फिर देर किस बात की है? हमारे कान उस मंत्र को सुनने के लिए जो है बेताब हैं।”
साधु, “तो फिर सुनो! तुम तीनों को यह मंत्र पढ़ना होगा— ‘कजरारे कजरारे तेरे प्यारे प्यारे नैना’। जैसे ही तुमने यह मंत्र पढ़ा कि तुम गायब हो जाओगे।”
गोपी, “साधु महाराज! यह बताओ कहीं हम हमेशा के लिए ही गायब ना हो जाएं? अगर हमें जो है वापस आना हो तब हम जो है कौन सा मंत्र पढ़ेंगे?”
साधु, “दिखाई देने के लिए तुम यह मंत्र पढ़ोगे— ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त, तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’।”
इतना कहकर साधु वहां से चला गया।
जग्गू, “अबे ओ सुन! पहले तो हम तीनों को जो है मंत्र पढ़कर देख लेना चाहिए कि ये मंत्र ठीक से काम करता भी है कि नहीं।”
इतना कहकर वो मंत्र पढ़ने लगे।
कालिया, “कजरारे कजरारे तेरे प्यारे प्यारे नैना…”
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कालिया, “यार! मंत्र तो हमने पढ़ लिया, लेकिन हमें पता कैसे चलेगा कि हम गायब हुए हैं कि नहीं हुए?”
गोपी, “हम तीनों को आईने में जाकर देखना चाहिए बे। अगर हम वास्तव में गायब हुए हैं, तो फिर हम अपने आप को आईने में नहीं देख पाएंगे।”
जग्गू, “अरे! तुम दोनों मूर्ख के मूर्ख ही रहोगे। चाय वाले के पास चलते हैं ना? अगर हम वास्तव में गायब हो गए हैं, तो वो चाय वाला जो है हमें देख नहीं पाएगा
और हम उसकी आंखों के सामने ही उसके सारे पैसे निकाल लेंगे। वैसे भी उसने हमारा बहुत अपमान किया है ना?”
कालिया, “अरे! पहली बार तूने अकलमंदी की बात की है बे। चल चलते हैं।”
वो तीनों चाय वाले की दुकान पर चले गए और जाते ही उन्होंने चाय वाले की गुल्लक से सारे पैसे निकाल लिए।
चाय वाले ने देखा कि उसकी गुल्लक अपने आप खुली और उसमें से सारे पैसे गायब हो गए।
चाय वाला, “अरे! अरे भैया यह क्या हो गया? लगता है गांव में भूत-प्रेत आ गए हैं। मेरी गुल्लक अपने आप खुल गई और पैसे गायब हो गए। अरे… अरे मैं तो लुट गया भैया! अरे मैं बर्बाद हो गया!”
वो तीनों फिर मुखिया के खेत में आ गए और दिखाई देने वाला मंत्र पढ़ने लगे।
जग्गू, कालिया और गोपी, “तू चीज बड़ी है मस्त मस्त, तू चीज बड़ी है मस्त मस्त…”
और वो फिर से दिखाई देने लगे।
जग्गू, “अबे यार! यह साधु तो वाकई पहुंचा हुआ निकला यार। हमने चाय वाले की आंखों के सामने उसके सारे पैसे निकाल लिए और वो जो है हमें देख भी नहीं पाया।
और तो और, उसे सिर्फ गुल्लक खुलती हुई दिखाई दी और पैसे गायब होते हुए दिखाई दिए जब हमने पैसे जेब में रखे थे।”
कालिया, “ओ! ये सब बातें छोड़ो बे। हमें अब बड़ा हाथ मारना चाहिए।”
गोपी, “ओ भाई! बिल्कुल सही कहा तूने बे। हम तीनों मुखिया के घर पर चलते हैं। आज रात हम उसकी सारी तिजोरी साफ कर लेंगे।”
जग्गू, “अबे! तो कुछ देर बाद रात होने वाली है। हम रात में ही मुखिया के घर पर चोरी करेंगे, क्या बोलता है?”
कालिया, “अबे! हम आधी रात में मुखिया के घर पर चोरी करेंगे, जब उसके सारे घर वाले गहरी नींद में सो जाएंगे।”
वो तीनों आधी रात का इंतजार करने लगे। आधी रात के बाद वह तीनों मुखिया के घर के बाहर खड़े हो गए। उन तीनों ने एक साथ मंत्र पढ़ना शुरू कर दिया।
जग्गू, “कजरारे कजरारे तेरे प्यारे प्यारे नैना…”
कालिया, “अबे! यह वाला मंत्र तो दिखाई देने वाला है भाई।”
जग्गू, “अबे! दूसरा मंत्र पढ़।”
गोपी, “अबे यार! क्यों कन्फ्यूज कर रहा है यार तू? कन्फ्यूज मत कर यार, रुक पढ़ता हूं।”
तभी वो लोग दूसरा मंत्र पढ़ते हैं।
तीनों, “तू चीज बड़ी है मस्त मस्त, तू चीज बड़ी है मस्त मस्त…”
जग्गू, “अब सही लग रहा है। चलो चलो अंदर! माल हमारा जो है वेट कर रहा है।”
मंत्र पढ़कर वो तीनों घर के अंदर चले गए। मुखिया और उसकी पत्नी सो रहे थे और दूसरे कमरे में उसकी पुत्री झुमरी सो रही थी।
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जग्गू, “तुम दोनों जाकर जो है मुखिया की तिजोरी खोलने की कोशिश करो, मैं अभी आता हूं।”
कालिया, “अबे ओ! आशिकी फिल्म के पिटे हुए आशिक, मुझे पता है तू कहां जा रहा है। अभी हम तीनों जो है ना चोरी करने आए हैं, समझा? चोरी पर ध्यान दे।”
गोपी, “हां जग्गू! अभी ज्यादा हीरोगिरी करने की जरूरत नहीं है।”
जग्गू, “अबे तुम दोनों क्यों चिंता कर रहे हो बे? हैं बे? वैसे भी हम तीनों दिखाई तो दे नहीं रहे, तो फिर किस बात का डर है?
अब मेरा दिमाग खराब मत करो। चलो जाओ तुम दोनों तिजोरी खोलो, मैं अभी आ रहा हूं। समझे? चलो!”
जग्गू की बात सुनकर कालिया और गोपी क्रोधित होते हुए तिजोरी के पास चले गए। जग्गू झुमरी के कमरे में चला गया और उसकी चारपाई पर बैठते हुए बोला।
जग्गू, “ओ झुमरी! तुम सोते हुए कितनी अच्छी लग रही हो? मैं तुमसे कितना प्रेम करता था, फिर भी तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया है?
लेकिन जो है मैंने तुम्हारी बात का बुरा नहीं माना। झुमरी, जब लकड़ियां मेरे शरीर पर टूट रही थीं ना, उस समय मुझे दर्द नहीं, ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कि मेरे शरीर पर कोई फूल… फूल…”
तभी अचानक झुमरी की आंख खुल गई। जग्गू मुस्कुराने लगा और अपने मन में बोला।
जग्गू, “लगता है मेरी आवाज सुनकर झुमरी की आंख खुल गई। लेकिन पगली जानती नहीं है कि मैं तो उसे दिखाई नहीं दूंगा।
चलो ठीक है, अदृश्य होकर कम से कम मैं अपने दिल की बात तो कह पा रहा हूं बे।”
तभी झुमरी क्रोधित होते हुए जग्गू की ओर देखकर बोली।
झुमरी, “तुम! तुम इतनी रात को मेरे कमरे में क्या कर रहे हो? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी चारपाई पर बैठने की?”
जग्गू को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ।
जग्गू, “डार्लिंग! तो क्या मैं तुम्हें दिखाई दे रहा हूं क्या?”
झुमरी, “हां हां! बदसूरत सांड, आवारा, बेशर्म! पूछ रहा है क्या मैं तुम्हें दिखाई दे रहा हूं कि नहीं?
अरे तू जरूर यहां पर चोरी करने आया होगा। पिछली रात तेरे शरीर पर लकड़ियां तुड़वाई थीं, इस बार तेरे शरीर पर अंडे तुड़वाऊंगी।”
इतना कहकर झुमरी जोर-जोर से चीखने लगी— “चोर! चोर! चोर!”
झुमरी की आवाज सुनकर मुखिया और उसकी पत्नी की आंखें खुल गईं। मुखिया ने देखा कि कालिया और गोपी तिजोरी से उसके पैसे निकाल रहे थे।
मुखिया, “अच्छा! तो अब तुम तीनों की इतनी हिम्मत हो गई कि तुम दिन दहाड़े घर में घुसकर चोरी करने लगे?”
कालिया, “मुखिया जी! हम तो रात में चोरी करने आए हैं, दिन में कहां हैं?”
गोपी, “अबे मूर्ख! ‘दिन दहाड़े’ और रात की बातें क्यों कर रहा है? अबे सवाल यह है कि हम सबको दिखाई दे रहे हैं बे।”
जग्गू, “लगता है उस साधु ने हम सबको मूर्ख बना दिया है। उसके मंत्रों ने काम नहीं किया बे!”
तभी झुमरी कमरे से निकलती हुई मुखिया के पास आ गई।
झुमरी, “पिताजी! मेरे कमरे में जग्गू है।”
मुखिया, “क्या? उस निकम्मे की हिम्मत कि वह अकेली लड़की के कमरे में चला गया?”
मुखिया अपने आदमियों को बुलाने लगा और कुछ ही देर में मुखिया के आदमी लाठी और डंडे लेकर वहां आ गए।
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मुखिया, “अरे देख क्या रहे हो? इन तीनों की मार-मार कर, मार-मार कर ऐसी हालत कर दो कि छह-सात महीने बिस्तर से उठ ही नहीं पाएं। मारो सालों को!”
मुखिया का आदेश सुनकर सारे आदमियों ने उन तीनों की मार-मार कर हालत बुरी कर दी। कुछ ही देर में तीनों बेहोश होकर गिर गए।
मुखिया, “अरे जाओ! जाकर इन तीनों को मेरे खेतों में फेंक आओ। वैसे भी यह तीनों मेरे खेत में ही पड़े रहते हैं। मनहूस कहीं के!”
अगली सुबह जग्गू, कालिया और गोपी की आंख मुखिया के खेत में खुली।
जग्गू, “अरे! अरे बहुत मारा रे… अइया! अरे मुझसे तो जो है उठा भी नहीं जा रहा… ई!”
कालिया, “अरे! अरे उन निर्दयी लोगों ने बिल्कुल भी तरस नहीं खाया। लाठियां ऐसे मार रहे थे, ऐसे मार रहे थे जैसे कि हमारे शरीर में हड्डियां नहीं लोहा लगा हो… लोहा!”
तभी वही साधु मुस्कुराता हुआ उनके पास आ गया।
जग्गू, “ये क्या साधु महाराज? तुमने हमें मूर्ख बना दिया है! अरे… जो मंत्र काम ही नहीं करते थे, तो फिर तुमने हमें ऐसे मंत्र क्यों बताए?”
साधु, “मैंने तुमसे कहा था ना कि तुम तीनों चतुर मूर्ख हो। अरे! तुम लोगों ने गलत मंत्र पढ़ा होगा।
और कई बार मेरे स्वयं के मंत्र रात में काम नहीं करते, तो फिर तुम्हारे मंत्र रात में कैसे काम करेंगे?”
कालिया, “अबे ओ साधु! तूने तो हमसे कल कहा था कि तेरे मंत्र रात में शक्तिशाली हो जाते हैं… शक्तिमान हो जाते हैं।”
साधु, “क्या मैंने ऐसा कहा था? लगता है गलती से मिस्टेक हो गया, क्योंकि मुझे भूलने की बीमारी है ना।
दरअसल मेरे मंत्र रात में कमजोर पड़ जाते हैं और दिन में शक्तिशाली हो जाते हैं। अब तुम एक काम करना, उन मंत्रों को दिन में पढ़ना।”
जग्गू, “कोई जरूरत नहीं है! कोई जरूरत नहीं है! हमें कोई मंत्र नहीं पढ़ने। चल भाग यहां से… सारा स्केलेटन हिल गया मेरा। मम्मी!”
गोपी, “जग्गू भाई, सही बोल रहे हो। मुझे तो लगता है कि मेरी किडनी जो है यहां ऊपर आ गई है भैया और दिल गायब हो गया लग रहा भैया। हाय… मैं मर तो नहीं गया?”
साधु, “अरे बच्चा! आज मैं फिर से बहुत प्रसन्न हूं। कोई वरदान चाहते हो तो मांग लो।”
जग्गू, “अरे साधु चाचा! ओ चाचा रुक जाओ भैया… आज हम आपको दक्षिणा देना चाहते हैं!”
गोपी, जग्गू और कालिया एक दूसरे को इशारा करते हैं और लंगड़ाते हुए साधु को पीटना शुरू कर देते हैं।
दोस्तो ये Funny Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!

