सर्दियों का छलावा | SARDIYON KA CHALAWA | Horror Kahani | Darawni Kahaniyan | Hindi Horror Stories

व्हाट्सएप ग्रुप ज्वॉइन करें!

Join Now

टेलीग्राम ग्रुप ज्वॉइन करें!

Join Now

हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” सर्दियों का छलावा ” यह एक Chalawa Horror Story है। अगर आपको Hindi Horror Stories, Horrible Stories या Darawani Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।


मसूरी से 70 कि.मी. आगे देवदार किला के बारे में मैंने बहुत कुछ सुना था। जहां जीपीएस के सिग्नल और इंसान की उम्मीद दोनों ही दम तोड़ देते हैं।

गाड़ी एक विशाल जर्जर बंगले के सामने रुकती है। चारों तरफ घना कोहरा है। आर्यन अपनी गाड़ी से उतरता है।

आर्यन, “क्या जगह है?”

वो अपना बैग उठाता है और बंगले के दरवाजे की ओर बढ़ता है। आर्यन उसे खटखटाता है।

दरवाजा खोलता है। सामने एक बूढ़ा आदमी खड़ा है। यह बिशन काका है।

बिशन काका, “साहब आ गए? लगा नहीं था कि इस मौसम में कोई अपनी जान… मेरा मतलब है अपना वक्त यहां बिताने आएगा।”

आर्यन, “अरे! रास्ते ने तो पूरी कोशिश की थी मुझे रोकने की। काका, अब अंदर आ सकता हूं? बाहर हड्डियां गलाने वाली ठंड है।”

बिशन काका, “ठंड… हां ठंड तो है। आइए आइए।”

आर्यन अंदर कदम रखता है। हवा में सीलन और किसी अजीब सी जड़ी बूटी के गलने की गंध है।

बिशन काका ने मुझे बताया कि इस विला में पिछले 10 सालों से कोई रुका ही नहीं। मुझे तो यही चाहिए था।

दुनिया से पूरी तरह से कट जाना। लेकिन पहले ही रात मुझे एहसास हो गया कि कट जाना और फंस जाना में बहुत बारीक फर्क होता है।

रात के 11:00 बज रहे हैं। आर्यन अंगीठी के सामने बैठा है। वो अपनी डायरी में कुछ लिख रहा है।

अचानक उसे लगता है कि खिड़की के कांच पर किसी ने नाखून से खरोचा है।

आर्यन, “कौन है?”

आर्यन उठता है और खिड़की के पास जाता है। बाहर घना कोहरा है। कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा।

वो जैसे ही मुड़ता है बिशन काका उसके पीछे खड़े मिलते हैं। आर्यन डर के मारे उछल पड़ता है।

आर्यन, “अरे काका! आप तो डरा ही देते हैं।”

बिशन काका, “आग को अकेला नहीं छोड़ते साहब। यह बुझ गई तो वो अंदर आ जाएगी।”

आर्यन, “वो कौन है?”

बिशन काका, “उसे पहाड़ी लोग सर्दियों का छलावा कहते हैं। दरअसल उसे ठंड पसंद नहीं इसलिए वो दूसरों की गर्मी चुरा लेती है।”

आर्यन, “काका, अब आप जाइए आप सो जाइए। मैं आपका ध्यान रखूंगा।”

बिशन काका, “दरवाजा मत खोलिएगा साहब। चाहे कोई भी हो दरवाजा मत खोलिएगा।”

बिशन काका अंधेरे गलियारे में गायब हो जाते हैं। इंसान का दिमाग भी अजीब चीज है।

हम जिस चीज से इंकार करते हैं, अवचेतन मन उसी का ताना-बाना बुनने लगता है।

काका की बातें अंधविश्वास थी, मैं जानता था लेकिन उस रात मैंने उसे देखा। आर्यन को बिशन काका की चेतावनी याद आती है।

लेकिन तर्क हावी हो जाता है। कोई मुसीबत में हो सकता है। वो सोचता है और दरवाजा खोलता है।

सर्दियों का छलावा | SARDIYON KA CHALAWA | Horror Kahani | Darawni Kahaniyan | Hindi Horror Stories

दहलीज पर एक युवती खड़ी है। उसने कोई जैकेट नहीं पहना है। सिर्फ एक लाल रंग की शॉल है जो उसके कंधों पर लिपटी है।

उसका चेहरा चांद की तरह सफेद है और होठ नीले पड़ने के बजाय ताजे खून जैसे लाल है। वो कांप नहीं रही है।

आर्यन, “आप… आप यहां इतनी ठंड में?”

युवती, “मेरी गाड़ी खराब हो गई है। क्या मैं थोड़ी देर के लिए आग के पास बैठ सकती हूं? मुझे बहुत ठंड लग रही है।”

आर्यन एक पल के लिए हिचकिचाता है। उसका तर्क कहता है कि कोई भी इंसान इतने हल्के कपड़ों में इस तूफान में जिंदा नहीं रह सकता।

लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब सी कशिश है। एक ऐसी गर्मी जो आर्यन को अपनी ओर खींच रही है।

आर्यन, “जी जरूर, आप अंदर आइए। आप जम जाएंगी बाहर।”

वो अंदर आती है। जैसे ही वो आर्यन के पास से गुजरती है आर्यन को एक झुलसा देने वाली गर्मी का एहसास होता है।

आर्यन, “मेरा नाम आर्यन है और आप?”

अनामिका, “अनामिका… क्योंकि मेरा कोई नाम नहीं है।”

अगले दो दिन धुंध में बीते। अनामिका कहीं नहीं गई। अनामिका अजीब थी। वो खाना नहीं खाती थी।

बस आग को घूरती रहती थी। और बिशन काका… वो तो गायब ही हो गए थे।

मैं उनके कमरे में गया लेकिन वहां कोई भी नहीं था। अनामिका ने कहा कि वो शायद नीचे गांव चले गए होंगे।

मुझे उस पर यकीन करना पड़ा। या शायद मैं करना चाहता था।

आर्यन, “तुम्हें अजीब नहीं लगता अनामिका? तीन दिन हो गए और तुम ना सोई हो ना तुमने कुछ खाया है

और यह गर्मी… तुम्हारे पास आते ही मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं किसी रेगिस्तान में हूं।”

अनामिका, “क्या तुम्हें यह अच्छा नहीं लगता, आर्यन?”

आर्यन, “पर यह सामान्य नहीं है। मुझे… मुझे चक्कर आ रहे हैं।”

आर्यन उठने की कोशिश करता है। लेकिन उसके पैर लड़खड़ा जाते हैं।

अनामिका, “मत जाओ। मेरे पास बैठो। मैं तुम्हें कहानी सुनाती हूं।

एक मुसाफिर की जो सर्दी से इतना डरता था कि उसने आग से सौदा कर लिया।”

तभी किसी के चिल्लाने की आवाज आती है। दबी हुई घुटती हुई चीख।

बिशन काका, “साहब… दरवाजा!”

आर्यन, “ये बिशन काका की आवाज थी। वो यहीं है।”

अनामिका, “वो बस हवा है। आर्यन बैठो।”

सर्दियों का छलावा | SARDIYON KA CHALAWA | Horror Kahani | Darawni Kahaniyan | Hindi Horror Stories

आर्यन, “नहीं मुझे देखना है।”

आर्यन अपनी पूरी ताकत बटोर कर खड़ा होता है और आवाज की दिशा में भागता है। वो तहखाने के दरवाजे पर पहुंचता है।

आर्यन मोबाइल की टॉर्च चलाता है और सीढ़ियां उतरता है। तहखाने में बर्फ जैसी ठंड है।

वहां पुराने फर्नीचर के बीच एक कोने में बिशन काका बंधे हुए पड़े हैं। उनका शरीर नीला पड़ चुका है।

आर्यन, “काका! काका किसने किया ये?”

आर्यन उनकी रस्सियां खोलने लगता है।

बिशन काका, “तुमने उसे अंदर आने दिया। मैंने कहा था कि दरवाजा मत खोलना।”

आर्यन, “वो कौन है काका? वो कहती है कि उसकी गाड़ी खराब हुई थी।”

बिशन काका, “गाड़ी? वो 40 साल पहले मर चुकी है। वो गर्मी नहीं देती।

वो आपकी गर्मी चूसती है। आपको लगता है आपको गर्मी लग रही है। अपना हाथ देखिए।”

आर्यन अपनी टॉर्च की रोशनी अपने हाथ पर डालता है।

बिशन काका, “ये उसका छलावा है। भागिए साहब, आग जलाइए!”

तभी सीढ़ियों के ऊपर एक परछाई उभरती है। अनामिका खड़ी है। लेकिन अब वो खूबसूरत युवती नहीं है।

उसकी त्वचा पारदर्शी है जिसके नीचे नीली नसें धड़क रही है। उसके बाल अब काले नहीं बल्कि सूखे हुए सफेद रेशों जैसे हैं। उसकी आंखें अंगारों की तरह जल रही है।

अनामिका, “तुमने खेल खराब कर दिया, आर्यन। कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी।”

उस पल मुझे समझ आया कि डर का असली चेहरा चीखना नहीं होता। डर का असली चेहरा वो लाचारी है

जब आपको पता चले कि आपकी अपनी इंद्रियां आपसे झूठ बोल रही थी।

मुझे गर्मी लग रही थी जबकि मैं असल में जम रहा था। अनामिका हवा में तैरते हुए नीचे आती है।

बिशन काका, “साहब, मेरी जेब में माचिस है। इसे जला दीजिए।”

आर्यन कांपते हुए अपनी सुन पड़ चुकी काली उंगलियों से काका की जेब टटोलता है। अनामिका अपना हाथ बढ़ाती है।

अनामिका, “मेरे पास आओ, आर्यन।

आर्यन, “दूर रहो मुझसे।”

आर्यन को माचिस मिल जाती है। पास ही केरोसिन का कनस्तर पड़ा है। अनामिका झपटती है।

आर्यन कनस्तर को अपने और उसके बीच जमीन पर फेंकता है और माचिस जलाता है।

आग का एक गोला लपकता है। लेकिन यह आग अजीब है। ये अनामिका को जला नहीं रही बल्कि उसके आरपार निकल रही है।

अनामिका जोर से हंसती है, “तुम मरे हुए को कैसे मारोगे? यह आग मुझे नहीं छू सकती।”

आग की रोशनी ने कमरे के कोनों को रोशन कर दिया और वहां आर्यन ने कुछ ऐसा देखा जिससे उसका खून पूरी तरह पानी बन गया।

सर्दियों का छलावा | SARDIYON KA CHALAWA | Horror Kahani | Darawni Kahaniyan | Hindi Horror Stories

वहां एक लाश पड़ी थी और उस लाश ने वही कपड़े पहने थे जो बिशन काका ने पहने हैं।

आर्यन झटके से अपनी गोद में लेटे बिशन काका की ओर देखता है। बिशन काका दुख भरी मुस्कान के साथ आर्यन को देख रहे हैं।

आर्यन, “काका… वो… वो लाश?”

बिशन काका, “मैं तो 10 साल पहले ही मर गया था साहब। मैं तो बस आपको बचाने की कोशिश कर रहा था।”

आर्यन का दिमाग सुन्न हो जाता है।

अनामिका, “ये बुड्ढा हमेशा बीच में आता है।”

अनामिका अब आर्यन की ओर बढ़ती है।

बिशन काका, “साहब भागिए ऊपर! सुबह होने वाली है। सूरज की पहली किरण ही इसे रोक सकती है।”

बिशन काका की आत्मा अनामिका से टकराती है। तहखाना हिलने लगता है। आर्यन अपनी पूरी जान लगाकर सीढ़ियों की तरफ भागता है।

पीछे से अनामिका की चीख आती है। आर्यन एक भारी कुर्सी उठाता है और पूरी ताकत से खिड़की के कांच पर दे मारता है।

कांच टूटता है। साथ ही एक हल्की नीली रोशनी अंदर आती है। तभी सूर्य की पहली किरण टूटी खिड़की से अंदर आती है

और सीधे अनामिका के चेहरे पर पड़ती है। वो चीखती है। वो कोहरे में वापस मिल जाती है। आर्यन वहीं फर्श पर गिर पड़ता है।

आर्यन अपनी आंखें खोलता है।

डॉक्टर, “मिस्टर आर्यन, आप मुझे सुन पा रहे हैं?”

आर्यन, “मैं… मैं कहां हूं? काका… बिशन काका?”

इंस्पेक्टर, “बिशन काका? आप उस चौकीदार की बात कर रहे हैं? हां उन्होंने ही मेरी जान बचाई है।”

आर्यन, “और वो औरत अनामिका?”

इंस्पेक्टर, “मिस्टर आर्यन, देवदार विला में पिछले 10 सालों से कोई नहीं रहता।

वहां के आखिरी चौकीदार बिशन सिंह की लाश कभी नहीं मिली थी। लोग कहते थे कि वो कहीं चले गए।”

आर्यन सन्न रह जाता है, “तो फिर… तो फिर वो कौन था? और मुझे किसने बचाया?”

डॉक्टर, “गांव के कुछ लोगों ने विला से धुआं उड़ते देखा था। जब हम वहां पहुंचे तो आप बेहोश थे। लेकिन एक अजीब बात थी।”

आर्यन, “क्या?”

डॉक्टर, “आप तहखाने में थे। एक पुराने कंकाल के पास लिपटे हुए पड़े थे।

फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक वो कंकाल बिशन सिंह का ही था। लेकिन एक चीज और है जो मेडिकल साइंस के हिसाब से नामुमकिन है।”

आर्यन, “क्या?”

डॉक्टर, “आपकी उंगलियां काली पड़ चुकी थी। हमें लगा था हमें आपके हाथ काटने पड़ेंगे। लेकिन जब हम आपको यहां लाए तो रिकवरी शुरू हो गई।

आपकी त्वचा पर जलने के निशान भी है। जैसे किसी ने बहुत गर्म लोहे से आपको पकड़ा हो।

आपकी गर्दन पर एक हाथ का निशान छपा है। एक औरत के हाथ का निशान।”

डॉक्टर चले गए। इंस्पेक्टर भी चले गए। मैं वहां अकेला लेटा था। मैंने सोचा चलो सब खत्म हुआ। मैं बच गया।

तभी मेरी नजर साइड टेबल पर रखे मेरे सामान पर पड़ी। मेरा बटुआ, मेरी घड़ी और मेरी वो डायरी जो मैं वहां लिख रहा था।

मैंने कांपते हाथों से डायरी उठाई। पन्ने पलटे। आखिरी पन्ना जो मैंने उस रात लिखा था जब अनामिका आई थी

सर्दियों का छलावा | SARDIYON KA CHALAWA | Horror Kahani | Darawni Kahaniyan | Hindi Horror Stories

लेकिन वहां मेरी लिखावट नहीं थी। वहां एक अलग शैली की लिखावट में कुछ लिखा था।

मैंने पढ़ा, “तुम बच गए आर्यन लेकिन याद रखना सर्दी हर साल आती है और अब मेरे पास तुम्हारा हिस्सा है। देखो अपनी छाती पर।”

मैंने अपना अस्पताल का गाउन हटाया और अपनी छाती देखी। वहां ठीक मेरे दिल के ऊपर त्वचा पर एक निशान उभरा हुआ था।

वो एक टैटू जैसा था। और तभी कमरे का तापमान अचानक से गिर गया। एसी बंद था। हीटर चल रहा था।

लेकिन मेरे मुंह से भाप निकलने लगी। खिड़की के कांच पर बाहर की तरफ से नहीं बल्कि अंदर की तरफ से कोहरा जमने लगा

और उस कोहरे में एक उंगली से शब्द उभरने लगे: “मैं इंतजार करूंगी अगले साल।”

मुझे एहसास हुआ कि वो छलावा बाहर नहीं रह गया था। वो मेरे अंदर आ गया था।

मुझे अब ठंड नहीं लग रही थी। मुझे गर्मी लग रही थी। बहुत ज्यादा गर्मी।


दोस्तो ये Chalawa Horror Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!


Leave a Comment

लालची पावभाजी वाला – Hindi Kahanii ईमानदार हलवाई – दिलचस्प हिंदी कहानी। रहस्यमय चित्रकार की दिलचस्प हिंदी कहानी ससुराल में बासी खाना बनाने वाली बहू भैंस चोर – Hindi Kahani