हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” भूतिया पेड़ ” यह एक Bhutiya Story है। अगर आपको Hindi Darawni Stories, Bhutiya Kahani या Horror Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।
कासगंज में रहने वाला भोला माता-पिता और छोटी बहन रीमा के साथ रहता था।
भोला अपने पिता के साथ जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर खेती करके अपने घर वालों का भरण-पोषण करता था। एक दिन रीमा अपनी मां से बोली।
रीमा, “मां! आज मेरा दसवीं का परिणाम आने वाला है, मुझे बहुत डर लग रहा है।”
मां, “बेटा! तूने इतनी मेहनत की है, डरती क्यों है? और हम सबका आशीर्वाद तेरे साथ है।”
भोला, “मेरी प्यारी गुड़िया! तू डरती क्यों है? तू पढ़ने में होशियार है और वैसे भी पिताजी कहते हैं ना— हमें मेहनत करनी चाहिए, परिणाम तो एक ना एक दिन हमें मिलेगा ही।”
रीमा, “भैया! आप क्या जानो पढ़ाई करना कितना मुश्किल है। और इतनी मुश्किल से पढ़ाई करने के बाद अगर परिणाम अच्छा ना आए तो कैसा महसूस होता है?”
मां, “रीमा! तू अपने भैया से ऐसे कैसे बात कर रही है?”
रीमा, “सही तो कह रही हूं मां! भैया क्या जाने पढ़ाई के बारे में? उन्होंने तो आठवीं के बाद स्कूल ही छोड़ दिया था।”
भोला, “मेरी प्यारी बहना! यह तो तू सही कह रही है कि मैं क्या जानूं पढ़ाई करने में कितनी मेहनत लगती है।
लेकिन तुझे देखकर अंदाजा तो लगा सकता हूं तू कितनी मेहनत से पढ़ाई करती है। तू अपना दिल बिल्कुल भी छोटा मत कर, तेरी परीक्षा का फल बहुत अच्छा आएगा।”
रीमा गुस्से में पैर पटकती हुई वहां से चली गई।
भोला, “मां! मैं नहीं चाहता कि रीमा को यह पता चले क्योंकि मैं जानता हूं कि वह ऊपर से चाहे जो भी बोले लेकिन दिल से बहुत कोमल है।
और फिर अगर रीमा मुझसे बड़ी होती तो वह भी मेरे लिए यही फैसला लेती जो मैंने उसके लिए लिया।”
मां, “बेटा! हमारे पास इस जमीन के छोटे से टुकड़े के सिवा और कुछ भी नहीं है। मुझे तो समझ नहीं आता कि आगे क्या होगा?”
भोला, “मां! मैं जानता हूं कि मैं अपनी बहन को उतना पढ़ाऊंगा जितना वह पढ़ना चाहेगी, चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े।”
मां, “भगवान तेरे जैसा बेटा अगर हर घर में दे, तो मां-बाप के बाद कोई भी भाई-बहन कभी अनाथ ना हो।”
भोला, “बस कर मां! तू मुझे बातों में मत लगा, मुझे खेतों पर जाना है। पिताजी इंतजार कर रहे होंगे।”
भोला के खेत के बीच सालों से एक पुराना वृक्ष था जिस पर एक पत्थर का टुकड़ा था।
भोला, “पिताजी! मां ने रोटी भेजी है, इसे खा लीजिए।”
पिताजी, “बेटा! पहले तू हरिया के खेतों पर चला जा। उसकी पत्नी तुझे बुलाने आई थी, बोल रही थी हरिया के पेट में बहुत जोरों का दर्द हो रहा है।”
भोला, “पिताजी! आप आराम कीजिए तब तक मैं हरिया के खेतों पर जाकर आता हूं।”
हरिया के खेतों पर।
भोला, “क्या बात है हरिया भाई?”
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हरिया, “आह भोला! मेरे पेट में बहुत जोरों का दर्द हो रहा है। और मैं साहूकार से हल घंटे के हिसाब से लाया था।
अभी कुछ खेत में हल चलाना बाकी है और यह दर्द मुझे काम नहीं करने दे रहा।”
भोला, “बस इतनी सी बात? मैं अभी आपका काम कर देता हूं।”
भोला हरिया का खेत जल्दी से जोत देता है और अपने खेत पर वापस आ जाता है।
पिताजी, “तू कितनी मेहनत करता है, सबका कितना ध्यान रखता है।”
भोला, “क्या पिताजी! आप भी कैसी बातें करते हैं, यह सब तो हमारे अपने हैं। पिताजी, आपको पता है आज रीमा का दसवीं का परीक्षा फल आने वाला है?”
पिताजी, “हां बेटा! परंतु अब हम रीमा को आगे नहीं पढ़ा पाएंगे। हमें उसकी पढ़ाई बंद करनी होगी।”
भोला, “आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं पिताजी? वह आगे पढ़ना चाहती है और वह पढ़ाई में कितनी होशियार भी है।”
पिताजी, “बेटा! हमारी स्थिति तो तू जानता है। आगे की पढ़ाई का खर्चा ज्यादा है जो हमारे बस की बात नहीं है।
और फिर आगे की पढ़ाई के लिए रीमा को शहर भेजना पड़ेगा, हम यह सब कैसे करेंगे?”
भोला, “पिताजी! आप बिल्कुल फिक्र मत कीजिए, मैंने सब सोच लिया है। और मैंने अपने गांव के मुखिया जी से बात भी कर ली है।”
पिताजी, “अब क्या बात कर ली है तूने मुखिया जी से?”
भोला, “मुखिया जी को अपने खेतों की फसल की रखवाली के लिए किसी की जरूरत है।
तो मैंने उनसे कह दिया है कि रात के समय मैं उनके खेतों की रखवाली करूंगा और दिन में अपने खेतों में काम करूंगा।
उसके बदले वह मुझे कुछ पैसे दे देंगे जो रीमा की पढ़ाई में काम आएंगे।”
पिताजी, “बेटा! तू इंसान है या देवता?”
भोला, “पिताजी! आप यह कैसी बातें कर रहे हैं?”
पिताजी, “पहले ही कितना मेहनत का काम होता है। यह जमीन भी ऐसी है कि इसको जोतने के लिए तुझे कितनी मेहनत करनी पड़ती है।
हम यहां ना तो ट्रैक्टर चला सकते हैं और ना ही हल चला सकते हैं। आधा खेत तो कुदाल से जोतता है, फिर तू यह कह रहा है
कि रात के समय तू मुखिया जी के खेतों की रखवाली करेगा? अरे सोएगा कब? ऐसे तो तू बीमार हो जाएगा।”
भोला, “कुछ नहीं होता पिताजी! मेरी तो उम्र अभी मेहनत करने की है, इसलिए मुझे मेहनत करनी होगी।
और आप फिक्र मत कीजिए पिताजी! आराम से बैठकर रोटी खाइए, मैं बचा हुआ काम जल्दी खत्म करता हूं और फिर हम दोनों घर चलते हैं। रीमा का परीक्षा फल भी तो आना है।”
शाम को घर पर।
रीमा, “पिताजी! मेरा दसवीं का परीक्षा फल आ गया। मैं अच्छे अंकों से पास हुई हूं।”
पिताजी, “बहुत-बहुत बधाई हो बेटा! हमें तुम पर पूरा विश्वास था। यह ले बेटा मुंह मीठा कर, हमेशा ऐसे ही नाम रोशन कर।”
भोला, “रीमा! बहुत-बहुत बधाई हो। तुमने आज पिताजी का सपना सच कर दिया, वह हमेशा से यही चाहते थे।”
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रीमा, “हां भैया! मुझे पता है पिताजी हमेशा से चाहते थे कि आप शहर जाकर पढ़ाई करें लेकिन आपने तो ऐसा किया नहीं।
और तो और आठवीं के बाद स्कूल जाना बंद कर दिया, इसलिए पिताजी का यह सपना मैं पूरा करूंगी और आगे की पढ़ाई के लिए शहर जाऊंगी। पिताजी! आप मुझे आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेजेंगे ना?”
रीमा के पिता कुछ बोले उससे पहले ही भोला बोल पड़ा।
भोला, “हां बहन! जरूर भेजेंगे। और आज ही पिताजी मुझसे कह रहे थे कि रीमा की परीक्षा का फल आ जाएगा तो हमें उसको आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेजना होगा।”
खेत के बीच में वृक्ष होने की वजह से वहां पर खेती करना बहुत मुश्किल होता था, क्योंकि गांव वाले रोज पूजा करने उस वृक्ष पर आते थे
जिसकी वजह से फसल को भी नुकसान होता था। पर कोई इस बारे में नहीं सोचता था।
रात को घर पर भोला के पिता भोला की मां से कहते हैं।
पिताजी, “अरे भाग्यवान! मैं सोच रहा हूं कि अपनी जमीन को बेच दूं और उससे जो पैसा मिलेगा वह पैसा भोला को दे दूं ताकि वह कोई व्यापार कर सके।
तुम तो जानती हो उस जमीन के टुकड़े पर कितनी मेहनत करनी पड़ती है। उस जमीन पर मेहनत करके मेरा शरीर तो खत्म हो चुका है, अब मैं नहीं चाहता कि भोला का भी मेरे जैसा हाल हो जाए।”
मां, “बात तो आप सही कह रहे हैं। आपने भोला से इस बारे में बात की?”
पिताजी, “नहीं! मैंने अभी तक उससे कोई बात नहीं की क्योंकि मैं जानता हूं वह मुझे कभी उस जमीन का सौदा नहीं करने देगा।
और तुम्हें पता है, उसने तो मुखिया जी से अपने काम के बारे में बात भी कर ली।”
मां, “कैसा काम?”
पिताजी, “मुखिया जी को अपने खेतों की चौकीदारी के लिए रात के वक्त कोई आदमी चाहिए था। भोला ने उस काम के लिए मुखिया जी से हां कह दिया है।”
मां, “हमने कुछ तो पुण्य कर्म किए होंगे जिसके कारण भोला जैसा बेटा हमें मिला। वह हम सबके बारे में कितना सोचता है। हीरे का दिल है मेरे बच्चे का।”
पिताजी, “सही कहती हो तुम! सच में खरा हीरा है हमारा बेटा। मैं कल जमीन के सौदे के बारे में भोला से बात करता हूं।”
दूसरे दिन सुबह खेत पर।
पिताजी, “बेटा भोला! मैं सोच रहा हूं कि इस खेत में इतनी मेहनत करके हमें मुट्ठी भर अनाज मिलता है, इससे अच्छा है कि मैं इस खेत का सौदा कर दूं।”
भोला, “पिताजी! आपने आज तो खेत के सौदे की बात कर दी, दोबारा मत कीजिएगा।
क्योंकि मैं जानता हूं यह खेत दादाजी की आखिरी निशानी है। मेरे जीते-जी ऐसा कभी नहीं होगा।”
भोला अपने दादाजी से बहुत प्यार करता था। भोला वृक्ष के नीचे जाता है।
भोला, “दादाजी! मैं जानता हूं पिताजी ने आज जो बात कही है वह किस परिस्थिति में कही है। लेकिन मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा।
इस खेत से मुझे आपकी खुशबू आती है। परंतु आज मुझे एक और बात महसूस हुई कि पिताजी को ऐसा लगने लगा है
कि मैं उनकी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर पा रहा हूं। दादाजी! मैं कोशिश तो कर रहा हूं लेकिन क्या करूं? कोई रास्ता समझ नहीं आता।”
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तभी एक आवाज आती है।
आवाज, “भोला बेटा! भोला!”
भोला, “कौन है? कौन है?”
आवाज, “मैं हूं बेटा! क्या तुमने मुझे नहीं पहचाना?”
भोला, “आप कौन हैं? और आप मुझे नजर क्यों नहीं आ रहे?”
आवाज, “मैं वृक्ष हूं, वृक्ष!”
भोला, “आप बोल सकते हैं? यह कैसे हो सकता है?”
वृक्ष, “हां बेटा! मैं बोल सकता हूं और सब कुछ सुन भी सकता हूं। मैंने तुम्हारी सारी बातें सुन ली और बचपन से तुम्हें देखता आया हूं।”
भोला, “क्या आप सच कह रहे हैं?”
वृक्ष, “हां बेटा! मैं सालों से यहां पर हूं।”
भोला, “परंतु आप बोल कैसे सकते हैं? आप तो एक वृक्ष हैं।”
वृक्ष, “बेटा! मैं एक श्रापित ऋषि हूं।”
भोला, “श्रापित ऋषि? मैं कुछ समझा नहीं। अगर आप ऋषि हैं तो आप वृक्ष कैसे बन गए?”
ऋषि, “100 साल पहले मैं इसी जगह पर अपनी कुटिया बनाकर तपस्या कर रहा था। तभी एक दिन एक राक्षस ने धोखे से मुझे जल में मदिरा मिलाकर पिला दी और मैं बहक गया।
जिसके परिणाम स्वरूप मेरी पत्नी ने मुझे श्राप दे दिया और मैं एक वृक्ष के रूप में यहां पर स्थिर हो गया।”
भोला, “आपने पहले कभी यह बातें किसी से कही हैं?”
ऋषि, “नहीं बेटा! मैंने आज तक यह बातें किसी से नहीं कही।”
भोला, “तो आज मुझसे क्यों कह रहे हैं? मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं?”
ऋषि, “तुमने तो मेरी मदद कर दी है। आज मुझे शापित हुए पूरे 100 वर्ष हो गए हैं।
इस श्राप से मुक्ति के लिए एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढना था जो हृदय से नेक हो। वह व्यक्ति तुम ही हो।”
भोला, “वो कैसे?”
ऋषि, “मुझे अपने हाथों से थोड़ा सा गंगाजल पिला दो।”
भोला गंगाजल लेकर आता है और वृक्ष के चारों तरफ जल डाल देता है। गंगाजल पड़ते ही वो वृक्ष एक ऋषि के रूप में बदल जाता है।
ऋषि, “तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद! आज तुमने मुझे श्राप से मुक्त कर दिया।”
भोला, “मैंने तो वही किया जो आपने मुझे करने को कहा।”
ऋषि, “मैं तुम्हारी इस दयालुता के लिए तुम्हें कुछ देना चाहता हूं। मैंने जो 20 वर्ष तपस्या की थी, उस तपस्या का आधा फल मैं तुम्हारे इस खेत में डाल देता हूं।”
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ऋषि भोला के खेत में घूमने लगते हैं और उनके शरीर से किरणें निकलकर खेत में प्रवेश करने लगती हैं।
ऋषि, “बेटा भोला! अब तुम्हारा यह खेत कोई मामूली खेत नहीं है। अब इस खेत में जादुई फसल होगी।”
भोला, “जादुई फसल?”
ऋषि, “हां! इस खेत में तुम्हें अलग-अलग तरह के फलों के वृक्ष लगाने होंगे और उन वृक्षों पर जो फल आएंगे वह फल कभी खत्म नहीं होंगे।
परंतु तुमने अगर अपना व्यवहार बदला, तो वे सदा के लिए फलों से रहित हो जाएंगे।”
भोला ऋषि को प्रणाम करने के लिए झुकता है और ऋषि वहां से गायब हो जाते हैं। भोला घर जाकर माता-पिता को सारी बातें बताता है।
पिताजी, “जैसा ऋषि ने कहा है, चलो हम इन पैसों से फलों के अलग-अलग पेड़ लाते हैं और अपनी जमीन में लगा देते हैं।”
भोला, “जी पिताजी! आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। लेकिन गांव वाले जब हमारे खेत में देवता की पूजा के लिए आएंगे और उन्हें वहां पर वृक्ष नहीं दिखेगा, तब क्या होगा?”
मां, “हां बेटा! यह तो मैंने सोचा ही नहीं। इसमें सोचना क्या है? अगर कोई पूछेगा तो आप कह दीजिएगा हमें क्या पता, रात को तो वृक्ष यहीं था।”
भोला, “नहीं मां! हम ऐसा जवाब नहीं दे सकते हैं।”
पिताजी, “बेटा! इस बारे में कल सोचेंगे।”
अगले दिन सुबह भोला और उसके पिता अपने खेत पर जाते हैं और उनकी आंखें खुली की खुली रह जाती हैं।
भोला, “पिताजी! जो मुझे दिख रहा है क्या वही आपको भी दिख रहा है?”
पिताजी, “हां बेटा! हमारे खेत पर रातों-रात ये मंदिर और चारदीवारी कैसे बन गई?”
भोला, “यह तो मुझे नहीं पता, परंतु ऐसा लगता है जैसे यह सब उसी ऋषि का चमत्कार है।”
तभी वहां मुखिया जी और गांव वाले आते हैं।
मुखिया जी, “अरे भोला! अरे क्या चमत्कार है भाई? रातों-रात वह वृक्ष कहां गायब हो गया और यह मंदिर किसने बना दिया भाई?”
भोला मुखिया जी को सारी बातें बताता है।
मुखिया जी, “भोला! उस ऋषि ने बिल्कुल सत्य कहा। तुम बहुत दयालु हो। तुम्हें फलों के वृक्ष लगाने के लिए यदि पैसों की जरूरत हो तो मुझसे ले लो और बिना ब्याज के मुझे वापस कर देना।”
भोला, “अब नहीं मुखिया जी! पैसे तो मैं आपसे ले लूंगा परंतु वापस आपको ब्याज के साथ करूंगा।”
मुखिया जी, “नहीं बेटा! मैं तुमसे ब्याज नहीं ले सकता। आज मेरी बारी है।”
भोला, “ठीक है, फिर मैं रात के समय आपके खेतों में चौकीदारी का काम करूंगा और आप यह पैसा मेरी मजदूरी में से काट लिया करेंगे।”
मुखिया जी, “ठीक है! जैसी तुम्हारी मर्जी।”
भोला और उसके पिता मुखिया जी से पैसे लेकर खेतों में फलों के वृक्ष लगाते हैं। बहुत जल्द वृक्षों पर फल आ जाते हैं।
पिताजी, “भोला! आज तुम्हारी मेहनत और प्रेम ने फल दिया है।”
भोला, “पिताजी! आप यह क्या कह रहे हैं?”
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पिताजी, “हां बेटा! यह तुम्हारी मेहनत और विश्वास ही है जो वृक्षों पर फल इतनी जल्दी आ गए हैं।”
भोला मंदिर में भगवान को भोग लगाता है। दूसरे दिन सुबह।
भोला, “पिताजी! कल वृक्ष से आम तोड़े थे, वहां पर फिर से दो नए आम के फल आ गए हैं!”
पिताजी, “हां बेटा! मैंने भी देखा। आज मैं फल तोड़कर शहर बेचने जा रहा हूं।”
मां, “हां बेटा! ऊपर वाला तुम्हें बहुत तरक्की दे। यह सब तुम्हारे परिश्रम और व्यवहार का ही फल है।”
भोला शहर से वापस आता है।
भोला, “मां! पिताजी! हमारे फल शहर में हाथों-हाथ बिक गए और यह देखिए कितने पैसे भी मिले।”
शाम को पिताजी बोले।
पिताजी, “बेटा! तुम्हारी मेहनत देखकर भगवान ने हमारी किस्मत बदल दी।”
भोला रोज फल बेचकर अच्छे पैसे कमाता और उसके घर की स्थिति बहुत अच्छी हो गई।
भोला, “रीमा! अब तुम जितना पढ़ना चाहती हो उतना पढ़ो। हमें पैसों की वजह से तुम्हारी पढ़ाई बंद करने की कोई जरूरत नहीं है।”
रीमा, “भैया! मुझे माफ कर दीजिए। मैं नहीं जानती थी कि आपने पढ़ाई क्यों छोड़ी और मैंने हमेशा आपके साथ कितना बुरा व्यवहार किया।”
भोला, “अरे पगली! तू तो मेरी छोटी बहन है। अगर तू मेरी बड़ी बहन होती तो तू भी ऐसा ही करती मेरे लिए। लेकिन अब पुरानी सारी बातें भूल जा और सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे।”
भोला ने मेहनत करना बंद नहीं किया। वह रात के समय मुखिया जी के खेतों में चौकीदारी का काम भी करता और अपना बगीचा भी देखा करता।
दोस्तो ये Hindi Bhutiya Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!

