हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” कॉलेज ट्रिप ” यह एक Chudail Ki Kahani है। अगर आपको Hindi Horror Stories, Scary Stories या Chudail Ki Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।
पहाड़ियों से घिरे घने जंगल में एक लड़की के बाल बिखरे हुए थे और शरीर पर काफी चोटें थी।
वह वहां किसी से अपनी जान बचाकर भाग रही थी पर अचानक से एक साया उसके सामने आता है और उसकी चीख उस घने जंगल में गूंजती है।
कुछ साल बाद…
यह कहानी तीन सहेलियों की है रिया, कविता और आंचल की जो एक ही कॉलेज में पढ़ती थी।
वह तीनों बचपन की दोस्त थी और जब उन्हें पता चलता है कि कॉलेज से उन्हें कुछ दिनों के लिए ट्रिप पर ले जा जा रहा है।
ट्रिप का नाम सुनते ही सभी बेहद खुश हो जाते हैं। लेकिन उनमें अगर कोई खुश नहीं था तो वह थी आंचल।
आंचल, “क्या फायदा यार ऐसे ट्रिप का जहां मैं जा ही नहीं सकती?”
कविता, “लेकिन क्यों आंचल..? तू हमारे साथ इस ट्रिप पर क्यों नहीं जा रही?”
आंचल, “यार तुझे तो पता है ना, मेरे पेरेंट्स मुझे कहीं जाने नहीं देते। अब तू ही बता मैं अपने पेरेंट्स के खिलाफ इस ट्रिप पर कैसे चली जाऊं?”
रिया, “आंचल, तू परेशान मत हो, तेरे घर में हम बात कर लेंगे। वैसे भी तू पूरे कॉलेज में फर्स्ट आई है, तेरा जाना तो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है।”
आंचल, “लेकिन यार तुझे तो पता है ना बचपन से ही मेरे ऊपर बुरी शक्तियों का साया रहा है। यही वजह है कि मां पापा मुझे बाहर जाने नहीं देते।”
कविता, “हां आचल हमें पता है। लेकिन तू कब तक इस डर से कहीं बाहर नहीं जाएगी?
कब तक अंकल आंटी इस तरह तेरा कवच बनकर तेरी रक्षा करेंगे? एक ना एक दिन तो तुझे उनसे दूर होना ही होगा।
आज नहीं तो कल वे तेरी शादी भी तो करवाएंगे ना। और वैसे भी तू कॉलेज की ट्रिप पर अकेली तोड़ ना जा रही है,
हम भी तो तेरे साथ हैं और तू और टीचर भी तो तेरे घर में बात कर लेगी।”
अपने दोस्तों की बात से आंचल एग्री होती है जिसके बाद आंचल की टीचर ही उसके घर वालों से बात करती है।
अब ना चाहते हुए भी आंचल के घर वाले उस ट्रिप पर भेज देते हैं। पहली बार तीनों दोस्त ट्रिप पर जा रही थी।
इस खुशी में उन तीनों को नींद ही नहीं आ रही थी। अब अगली सुबह होते ही तीनों दोस्त कॉलेज जाती है
और कॉलेज वाले कॉलेज के सभी लड़के और लड़कियों को बस में बैठाकर अपनी डेस्टिनेशन के लिए चल पढते हैं।
बस में बहुत हलचल हो रही थी। कोई गाना गा रहा था तो कोई मस्ती कर रहा था।
आंचल को विंडो सीट पसंद थी इसलिए वह शांत बस में विंडो सीट के पास बैठी बाहर का नजारा देख रही थी।
उसे हसीन वादियां और शांत एनवायरनमेंट बहुत पसंद था। बस में इतनी चहल पहल होने के बाद भी आंचल का पूरा ध्यान बस से बाहर था।
कॉलेज ट्रिप | COLLEGE TRIP | Horror Story | Chudail Ki Kahani In Hindi | Horror Stories in Hindi
अब वो लोग जैसे ही अपने डेस्टिनेशन के पास पहुंचते हैं वैसे ही आंचल के चेहरे पर एक ठंडी हवा आती है और उसे किसी पैरानॉर्मल एक्टिविटी का एहसास होता है।
आंचल को बचपन से ही भूत प्रेत से काफी डर लगता था। कई बार उससे कुछ बुरी शक्तियों का भी अपने पास होने का एहसास हो चुका था।
बस यही वजह थी कि उसके घर वाले उसे अकेले कहीं नहीं जाने देते थे क्योंकि कई बार आंचल के ऊपर बरी शक्तियां हावी हो चुकी थी।
शायद ऐसा ही कुछ इस बार भी आंचल के साथ होने वाला था। बस अपने रास्ते चल रही थी।
जैसे ही वह ठंडी हवा आंचल की चेहरे पर लगती है वह घबरा जाती है और उसे महसूस होता है कि इस जगह पर कोई बुरी शक्ति है।
ठंड का समय था लेकिन फिर भी आंचल के चेहरे से पसीना टपकने लगता है और वह घबराती हुई रिया से कहती है,
आंचल, “रिया, मुझे यहां कुछ ठीक नहीं लग रहा है।”
आंचल, “मैम, इस ड्राइवर से बोलो ना कोई दूसरा रास्ता ले ले या तो फिर यहां से तेजी से बस चलाए।
तुम जानती हो ना अगर मेरे आसपास कोई बुरी शक्तियां होती है तो मुझे उनका आभास होता है और मुझे अभी आभास हो रहा है।”
रिया इन सब बातों पर विश्वास करती थी और रिया आंचल की बचपन की दोस्त थी तो उसने कई बार आंचल की बुरी हालत देखी थी।
इसलिए वह आंचल की बात पर विश्वास कर लेती और कविता से कहती है,
रिया, “कविता, आंचल को यहां कुछ सही नहीं लग रहा है और तू जानती है ना आंचल के बारे में।
मैम से बोल कि ड्राइवर को बोले कि रास्ता चेंज कर ले या फिर बस तेजी से चला ले हमें जल्द जल्द यहां से निकलना होगा।”
कविता, “प्रिया, आंचल के बारे में सिर्फ तुझे और मुझे पता है और किसी को नहीं यहां कोई हमारी बातों पर विश्वास नहीं करेगा
और हम सब एक साथ है कुछ नहीं होगा। बस थोड़ा सा ता और बचा है हम लोग जल्दी यहां से निकल जाएंगे।”
तीन सहेलियां आपस में बात कर ही रही होती है कि अचानक से बस रुक जाती है और बस के पीछे से धुआ निकलने लगता है।
अचानक से ब्रेक लगते ही आंचल समझ जाती है कि कुछ गलत होने वाला है। पर बस में बैठे बाकी सभी इसे एक अनहोनी समझते हैं।
अब सभी बस से नीचे उतरते हैं और ड्राइवर बस को देखकर टीचर और कॉलेज के सभी बच्चों से कहता है,
ड्राइवर, “मैडम, बस खराब हो गई है। अब ये बस नहीं चल पाएगी। हमें किसी मैकेनिक को बुलाकर इस बस को ठीक करवाना पड़ेगा।”
टीचर, “ड्राइवर, ये तुम कैसी बातें कर रहे हो? हम हाईवे पर हैं, इतनी रात में यहां पर मैकेनिक कहां से मिलेगा?”
आंचल, “मैडम हमारा यहां ज्यादा देर रुकना सही नहीं है। हमें यहां से चलना चाहिए।”
टीचर, “हां, कुछ तो करना ही पड़ेगा। यह बस भी ना इसी समय पर धोखा दे जाती है।
चलो हम सब थोड़ा आगे चलकर देखते हैं। क्या पता आसपास में रहने के लिए कोई होटल मिल जाए?”
इतना बोलकर कॉलेज के सभी स्टूडेंट एक साथ चलने लगते हैं सब आपस में उस रास्ते को एंजॉय कर रहे थे।
पर आंचल अब भी डरी सहमी चल रही थी। आंचल को अभी भी ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई उसके पीछे है, कोई उसके साथ चल रहा है।
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आंचल रिया और कविता से कुछ बोलती उससे पहले ही उसे महसूस होता है जैसे पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा हो।
आंचल डरती हुई पीछे मुड़कर देखती है लेकिन वहां कोई नहीं था। एक बार फिर वह अपने कॉलेज के बच्चों के साथ चलने के लिए आगे की ओर घूमती है
तो वह देखती है कि कॉलेज के सभी बच्चे गायब हो चुके हैं। यहां तक कि उसकी दोस्त रिया और कविता भी उसके साथ नहीं है और वह खुद एक अनजान सी जगह में है।
वो खुद को एक कने से जंगल में पाती है और तभी एक बिजली पेड़ पर गिरती है।
कुछ देर बाद एक पेड़ टूटकर आंचल की तरफ गिरने लगता है पर आंचल खुद को बचा लेती है और डरती हुई जंगल से बाहर भागने की कोशिश करती है।
पर तभी अचानक से एक हाथ आंचल का पैर पकड़कर उसे नीचे की ओर खींच लेता है।
आंचल, “बचाओ, कोई है यहां? कोई मुझे बचाओ!”
इतना बोलकर आंचल जैसे तैसे अपना पैर छुड़वाकर एक बार फिर भागने ल लगती है और एक पत्थर से उसका पैर टकरा जाता है
और वह नीचे गिर जाती है। उसके नीचे गिरते ही कविता उसे उठाती है और उससे कहती है,
कविता, “आंचल क्या हुआ तुझे? तू अचानक से कैसे गिर गई? यहां… यहां तो कुछ भी नहीं है।”
आंचल अपने सामने कविता और बाकी लोगों को देखकर और भी ज्यादा डर जाती है उसके साथ जो घटना घटी थी,
उसके बारे में आंचल उन सबको बताना चाहती थी पर वो कुछ बोल नहीं पाती। जिसके बाद आंचल की टीचर उससे कहती है,
टीचर, “आंचल, इतनी ठंड में तुम्हें पसीना आ रहा है, सब ठीक तो है ना? चलो, हम पहले होटल चलते हैं।
होटल सामने ही दिख रहा है फिर वहां जाकर तुम बताना तुम्हें हुआ क्या है? ठीक हो तुम?”
आंचल की ऐसी हालत देखकर उसकी टीचर भी समझ चुकी थी कि उसके साथ कुछ ठीक नहीं चल रहा था।
अब वो लोग जल्दी से एक होटल में जाते हैं और तीन कमरे बुक करते हैं जिसमें एक कमरे में आंचल, कविता, रिया और उसके टीचर थे।
तो दूसरे कमरे में बाकी के सभी स्टूडेंट और तीसरे कमरे में बस ड्राइवर।
कमरे में आने के बाद सब फ्रेश हो जाते हैं पर आंचल अब भी खिड़की के बाहर देख रही थी। यह देख उसकी टीचर उससे कहती है,
टीचर, “आंचल मैं काफी देर से देख रही हूं तुम मुझे कुछ ठीक नहीं लग रही। बस में भी तुम उदास चुपचाप बैठी थी
और खिड़की के बाहर ही देख रही थी। तुम अब भी काफी डरी हुई हो और इतनी सर्दी में भी तुम्हें पसीने आ रहे हैं। सब ठीक तो है ना?”
आंचल, “टीचर, यहां कुछ ठीक नहीं है। मैं जानती हूं आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं होगा।
पर बचपन से ही मुझे पैरानॉर्मल एक्टिविटीज का आभास होता है और यहां रात में हमारे लिए रुकना खतरे से खाली नहीं है।
ये पूरा गांव ही शैतानी शक्तियों से भरा हुआ है जो मुझ पर हावी होने की कोशिश कर रहा है। मुझे डर है कहीं वे मुझे अपना शिकार ना बना ले?”
आंचल की बातों से टीचर भी डर जाती है पर उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था। इसलिए वह रात बिताने की सोचती है।
आंचल की टीचर आंचल को और उसकी दोस्तों को कुछ तो समझा देती है।
पर जब से उसने आंचल के मुंह से यह सब कुछ सुना था तब से वह खुद भी अंदर से डर चुकी थी।
अभी वो लोग सही से आराम भी नहीं कर पाए थे, कि अचानक से उनके कमरे का दरवाजा कोई जोर जोर से पीटता है।
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टीचर, “इस वक्त कौन हो सकता है? और इतनी तेज से दरवाजा कौन पीट रहा है? लड़कियों, तुम डरो मत। मैं हूं ना… मैं देखती हूं।”
रिया, “पर मैम, इस वक्त दरवाजा खोला सही नहीं रहेगा, रहने देते हैं। बहुत जल्द सुबह होने वाली है, अब सीधा सुबह ही दरवाजा खोलेंगे।”
टीचर, “रिया, यह तुम कैसी बातें कर रही हो? क्या पता बाहर हमारा कोई साथी हो जिसे हमारी मदद की जरूरत हो? ऐसे में हम स्वार्थी नहीं बन सकते।”
इतना बोलकर रिया के टीचर दरवाजा खोलती है और वो दरवाजे के बाहर बस ड्राइवर को देखते हैं।
बस ड्राइवर को देख सभी हैरान हो जाते हैं और टीचर बस ड्राइवर से सवाल करती है,
टीचर, “यह क्या बदतमीजी है? आखिर तुम इतनी रात को इतनी जोर से दरवाजे को क्यों पीट रहे हो? तुम्हारे पास मेरा फोन नंबर भी तो है,
तुम मुझे फोन भी कर सकते हो। जानते हो तुम्हारी वजह से लड़किया कितनी ज्यादा डर गई है?”
ड्राइवर, “माफ करना मैडम पर फोन में नेटवर्क नहीं आ रहा इसलिए फोन नहीं कर सका
वैसे मैंने यहां के होटल स्टाफ से बात की तो उसमें से एक मैकेनिकल इंजीनियर निकला। उसने कहा है कि वह बस ठीक कर देगा।
एक बार आप उस मैकेनिक से बात कर लीजिए, वह पैसे थोड़े ज्यादा मांग रहा है।”
टीचर, “अच्छा ठीक है तुम चलो। लड़कियों, दरवाजा बंद कर लो मैं अभी पंद्मिरह नट में आती हूं।”
इतना बोलकर टीचर बस ड्राइवर के साथ चल देती है और थोड़ी ही दूर जाकर बस ड्राइवर अपनी गर्दन पीछे की ओर घुमा लेता है
और आंचल को देखकर एक डरावनी हंसी हंसता है। यह देखकर आंचल की आंखें फटी की फटी रह जाती है
क्योंकि यह नजारा सिर्फ और सिर्फ आंचल ही देख पा रही थी। आंचल अपने दोनों दोस्तों को इस बारे में बताती है,
आंचल, “रिया… कविता, टीचर जिसके साथ गई है वे हमारा बस ड्राइवर नहीं है वे कोई बुरी शक्ति है। हमें अपने टीचर को बचाना होगा!”
रिया, “आंचल, यह तू क्या कह रही है? क्या तूने सच में फिर से कुछ देखा?”
यह सुनते ही रिया और कविता के होश उड़ जाते हैं। अब वोह तीनों अपने टीचर को बताने के लिए आगे जाती हैं।
पर तभी उनके रास्ते में उनका बस ड्राइवर आता है जिसकी हालत काफी खराब थी। वह उनके सामने आते ही उनके पैरों के सामने गिर जाता है और अदमरी हालत में कहता है,
ड्राइवर, “जल्दी से कॉलेज के सभी बच्चों को बचाओ। सभी की जान खतरे में है।”
इतना बोलकर बस ड्राइवर अपना दम वहीं तोड़ देता है। बस ड्राइवर को अपने सामने मरता देख रिया
और कविता को आंचल की कही हर एक बात पर यकीन हो जाता है और बस तीनों अपनी टीचर को बचाने के लिए उनके पीछे भागती हैं
जहां वो देखती है कि उनकी टीचर और कॉलेज के बाकी बच्चे उस आत्मा के वश में है और वे सभी खाई की तरफ आगे बढ़ते जा रहे हैं।
आंचल, “टीचर रुक जाओ, आगे खाई है। आप सबको क्या हो गया है? आप सब हमारी आवाजें क्यों नहीं सुन रहे?”
रिया, “आंचल, अब तू ही कुछ कर सकती है। कुछ तो करके देख। हमारी आवाज क्यों नहीं सुन रहा कोई? उन सबको कुछ हो जाए, उससे पहले तू कुछ कर।”
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अब रिया और कविता को सिर्फ आंचल से ही उम्मीद थी क्योंकि आंचल बचपन से ही बुरी शक्तियों के बीच पली बड़ी थी और वो पूरी शक्तियों को पहचान सकती थी।
आंचल अपने गले के ताबीज पर हाथ रखती है और कुछ मंत्र पढ़ते हुए उन सबको बचाने के लिए आगे बढ़ती है कि तभी उसके सामने एक भयानक काला साया आ जाता है।
उस काले साय को देख आंचल का माथा पसीने से भीग जाता है लेकिन फिर भी आंचल हिम्मत नहीं हारती और वह आगे बढ़ती है।
लेकिन तभी पीछे से एक काला साया आता है और रिया और कविता को हवा में उड़ाकर खाई में फेंक देता है।
खाई में गिरते ही रिया और कविता की मौत हो जाती है।
अपनी आंखों के सामने अपनी दोस्तों का अंतिम समय देखकर आंचल जमीन पर बैठ जाती है कि तभी उसे वहां पर किसी के जोर-जोर से हंसने की आवाज सुनाई देती है।
आवाज, “तुझे क्या लगा कि तू अपने इस ताबीज की शक्ति से इन लोगों को बचा लेगी? नहीं मूर्ख लड़की, तू आत्माओं की दुनिया में है। तू इस काली अंधेरी में है। तू किसी को नहीं बचा सकती।”
आंचल कुछ बोलती कि तभी वह काली रात और घनी हो जाती है और उस काले अंधेरे में ना सिर्फ आंचल की टीचर बल्कि उसके कॉलेज के सभी स्टूडेंट जो ट्रिप पर आए थे।
उस खाई में एक एक कर अपनी छलांग लगाते हैं। आंचल सभी को आवाज लगाती रहती है। वो चीखती रहती है
लेकिन उसकी कोई नहीं सुनता और इस तरह आंचल के साथ आए हुए जितने भी लोग थे, उन सभी की मौत हो जाती है।
अगर कोई बचता है तो वह थी आंचल क्योंकि उसके गले में वह लॉकेट था।
आंचल अपने सामने अपने सभी दोस्तों और टीचर के मृत शरीर देखकर वहीं बेहोश हो जाती है
और जब अगली सुबह उसकी आंख खुलती है तो वह खुद को अस्पताल में पाती है।
उसके आसपास पुलिस थी। पुलिस उससे पूछताछ करती लेकिन आंचल अपनी आवाज खो बैठती है।
उस सदमे का आंचल पर इतना गहरा असर हुआ था कि आंचल अब अपनी जिंदगी में कभी बोल ही नहीं सकती थी।
दोस्तो ये Horror Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!

