हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” ईमानदार किसान ” यह एक Hindi Story है। अगर आपको Hindi Stories, Hindi Kahani या Achhi Achhi Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।
किसान वीरू बहुत मेहनती और गांव का सबसे समझदार इंसान था। लोग उसका बहुत आदर करते थे। हर साल वीरू की फसल सोना उगलती थी।
एक बार वीरू जब राज्य का कर जमा करने राजमहल पहुंचा, तो उसने देखा।
मंत्री, “महाराज! राजकोष खाली हो रहा है। हमें प्रजा पर और कर लगाने होंगे वरना हम दिवालिया हो जाएंगे।”
महाराज, “परंतु कैसे? प्रजा पर और बोझ नहीं डाला जा सकता। आखिर हमारी फसलों से पैसा क्यों नहीं आता?”
मंत्री, “महाराज! ज्यादातर खेत बंजर हो गए हैं। वहां हल नहीं चलाया जा सकता। इसका असर फसलों पर भी पड़ता है महाराज।”
वीरू को पता था कि महाराज के लोग शाही खेतों में मेहनत से काम नहीं करते। उसे एक उपाय सूझा।
वीरू, “महाराज! मैं आपकी समस्या का समाधान कर सकता हूं।”
महाराज, “तुम? तुम एक साधारण किसान हो! माना कि तुम्हारे खेतों में अच्छी फसलें होती हैं, पर यह शाही मामला है।”
वीरू, “महाराज! आप मेरे ऊपर एक बार विश्वास करके देखें। मेरे पास एक सुनहरी मुर्गी है जो हर रोज एक सोने का अंडा देती है।”
महाराज, “क्या तुम सच कह रहे हो? याद रखो, यह कोई मजाक हुआ तो तुम्हारा सर धड़ से कट सकता है।”
वीरू, “अरे महाराज! मेरी ऐसी हैसियत कहां जो मैं आपके साथ मजाक कर सकूं। यह मुर्गी मैं आपको दे सकता हूं, लेकिन एक ही मुश्किल है।”
महाराज, “कैसी मुश्किल? तुम निडर होकर बताओ।”
वीरू, “इस मुर्गी को केवल खेत में ही रखा जा सकता है। यह अंडे खेतों में देती है।
जितना ज्यादा बड़ा खेत होगा, उतने ज्यादा यह अंडे देगी। जितनी ज्यादा मिट्टी मुलायम होगी, उतने ज्यादा अंडे सुरक्षित रहेंगे।”
महाराज, “यह भी कोई मुश्किल बात है? मंत्री जी! कल से ही शाही खेतों में अच्छी तरह से हल चलाकर मिट्टी को मुलायम कर दिया जाए।”
राजा के सिपाही पूरे राज्य के खेतों में हल चलाने लगते हैं। मिट्टी को खूब नरम बना दिया जाता है। वीरू चुपचाप जाकर वहां अनाज के बीज बो आता है।
पांच दिन बाद महाराज खेत में पहुंचते हैं।
महाराज, “मुर्गी ने अंडे तो दिए हैं, लेकिन ये तो साधारण अंडे हैं! वीरू कहां है? उसने हमें धोखा दिया।”
वीरू को लाया जाता है।
वीरू, “महाराज! अभी मिट्टी को पानी की जरूरत है, तब जाकर मिट्टी नरम होगी और मेरी मुर्गी अंडे देगी। आप खेतों में पानी डलवाने का इंतजाम करवा दीजिए।”
महाराज के सैनिक खेतों में सिंचाई कर देते हैं। कुछ दिनों बाद बढ़िया पौधे निकलने लगते हैं। एक महीने बाद महाराज वापस खेत में जाते हैं।
महाराज, “वीरू! तुमने हमें धोखा दिया है। तुम्हारी मुर्गी सोने के अंडे नहीं देती!”
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वीरू, “महाराज! असली खजाना मेहनत और ईमानदारी में है। शाही खेतों में सही समय पर जुताई और सिंचाई हुई, अब बेहतरीन फसल होगी। राजकोष सोने से भर जाएगा।”
महाराज, “तू सही कह रहा है। मुझे अपनी गलती समझ आ गई। मैं चाहता हूं कि तुम मेरे सलाहकार बन जाओ।”
सब कुछ अच्छा चल रहा था कि एक दिन सूचना आई।
सिपाही, “दुहाई हो महाराज! राज्य में काली नाम की एक जादूगरनी घुस आई है। जो उसकी बात नहीं मानता, वह उन्हें पत्थर का बना रही है।”
महाराज, “मैं तो जादू से वैसे भी बहुत डरता हूं। वीरू! तुम्हारी परीक्षा की घड़ी आ गई है।”
वीरू, “महाराज! आप चिंता ना करें। मैं खुद उसके पास जाकर उसका सामना करूंगा।”
वीरू काली के जादुई महल में जाता है।
वीरू, “काली! तुम एक शक्तिशाली जादूगरनी हो। मैं जानना चाहता हूं कि तुम हमारे गांव में क्यों आई हो?”
काली, “तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझसे ऐसा प्रश्न पूछने की? यह सारा ब्रह्मांड मेरा है!”
वीरू, “तू गांव वालों को डराकर पत्थर बनाती है, उन्हीं से तेरा अंत होगा।”
वीरू गांव वालों को एकजुट करता है और सब मिलकर काली के महल पर पत्थरों से हमला कर देते हैं।
काली घबराकर गायब हो जाती है। महाराज वीरू को मंत्री बना देते हैं। यह देख पुराना मंत्री ईर्ष्या करने लगता है। वह काली से मिलता है।
मंत्री, “काली! मुझे वीरू को खत्म करने में मदद करो। बदले में मैं तुम्हें राज्य का आधा हिस्सा दूंगा।”
काली, “वीरू बहुत चतुर है, लेकिन उसने मुझसे दुश्मनी कर ली है। मैं उसे अपने जादुई जाल में फंसा लूंगी।”
काली मंत्री को दो जादुई बीज देती है।
काली, “तुम इस बीज को वीरू के खेत में लगा दो और दूसरा राजा के खेत में। वीरू के खेत में सोने के सेब फलेंगे और राजा के खेत में लोहे के।”
मंत्री बीज लेकर राजा के पास जाता है।
मंत्री, “महाराज! मेरी तपस्या से खुश होकर एक परी ने यह बीज दिया है। इसे राज्य के सबसे समझदार व्यक्ति के हाथों से लगवाना होगा।”
महाराज, “शाबाश! यह बीज वीरू को दे दो।”
मंत्री वीरू को लोहे के सेब वाला बीज दे देता है और खुद सोने वाला बीज वीरू के खेत में लगा देता है। कुछ दिन बाद राजा वहां पहुंचते हैं।
महाराज, “अरे! हमारे खेतों में तो लोहे के सेब उगे हैं!”
मंत्री, “महाराज! मुझे माफ करें, लेकिन मैं यह सोने का सेब वीरू के खेत से लेकर आया हूं।”
महाराज, “वीरू! मैंने उस पर इतना विश्वास किया और उसने मुझे धोखा दिया!”
वीरू के घर की तलाशी ली जाती है और वहां सोने के सेब मिलते हैं। वीरू को जेल में डाल दिया जाता है। वीरू का बेटा मुन्ना उसे बचाने का निश्चय करता है।
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मुन्ना की दादी, “देख मुन्ना! उसे हराने के लिए तुझे महामाया की सच्ची शक्ति की जरूरत है। मैं तुझे एक मंत्र सिखाती हूं।”
मुन्ना काली के महल जाता है और मंत्र पढ़ने लगता है।
काली, “तेरी इतनी हिम्मत!”
मुन्ना, “काली! बुराई सच्चाई से जीत नहीं सकती।”
मुन्ना जोर-जोर से मंत्र पढ़ता है, जिससे काली अपनी शक्तियां खो देती है और एक साधारण महिला बन जाती है।
मुन्ना, “काली! अगर तुम जीना चाहती हो तो महाराज के सामने सच्चाई बताओ।”
काली महाराज को सब सच बता देती है। महाराज वीरू को छोड़ देते हैं। काली को सम्मान मिलता है, तो उसका मन बदल जाता है।
वह उसी गांव में रहने लगती है। कुछ समय बाद अकाल पड़ता है।
काली, “अब इस गांव के लिए मुझे अपने जीवन का एक बड़ा त्याग करना होगा।”
काली अनुष्ठान करती है और बारिश आ जाती है, लेकिन वह अपनी आंखें खो देती है।
गांव वाले, “काली मौसी! आपने हमारी जान बचाई है।”
काली, “मुझे खुशी है मेरी जिंदगी किसी के काम आई।”
एक दिन जंगल से एक अजीब प्राणी ‘वनदेव’ आता है।
काली, “वीरू भाई! वनदेव संकट में हैं। उन्होंने इंसानों का साथ देना शुरू किया है, इसलिए बुरी शक्तियां उन्हें खत्म करना चाहती हैं।”
गांव वाले काली के सिखाए जादू से बुरी शक्तियों को रोकने की कोशिश करते हैं। रात को अंधेरा होते ही बुरी शक्तियां हमला कर देती हैं।
काली, “समय आ गया है, मुझे अपनी जान की कुर्बानी देनी होगी।”
काली अपनी सारी शक्तियों को सांसों में रोक लेती है और एक चकाचौंध रोशनी में बदल जाती है।
रोशनी से बुरी शक्तियां गायब हो जाती हैं, लेकिन काली जमीन पर गिर जाती है।
काली, “वीरू! असली जादू सच्चाई, मेहनत और आपसी प्रेम में होता है।”
ऐसा कहने के बाद काली की मृत्यु हो जाती है। गांव का नाम उसके सम्मान में ‘कालीपुर’ रख दिया जाता है।
दोस्तो ये Hindi Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!

