हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” काम पिशाचिनी ” यह एक Pishachini Ki Kahani है। अगर आपको Hindi Horror Stories, Horrible Stories या Darawani Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।
शहर का लड़का आरव एक पेशेवर फोटोग्राफर, अपनी बचपन की गर्लफ्रेंड अनुष्का और दोस्त नील के साथ एक वीरान गांव रत्नपुर पहुंचा था।
उसे वहां एक पुरानी हवेली की फोटो सीरीज शूट करनी थी, जो वर्षों से वीरान थी।
नील, “कहते हैं वहां रात को किसी औरत की सिसकियां सुनाई देती है।”
अनुष्का, “व्हाट द हेल? तो हम वहां क्यों जा रहे हैं?”
आरव, “अरे! यह सब बकवास होती है।”
नील, “हालांकि कुछ लोग दावा करते हैं कि वहां काम पिशाचनी रहती है। एक ऐसी आत्मा जो सुंदर रूप में प्रकट होती है और फिर आदमियों की हवस के सहारे उनकी आत्मा चूस कर मार डालती है।”
अनुष्का, “मतलब मुझे डरने की जरूरत नहीं है। अगर यह सच हुआ तो वाट तुम लोगों की लगेगी।”
आरव, “वाह वाह! कितनी खुश हो रही है यह सुनकर?”
अनुष्का, “हां क्यों नहीं? तुम्हें ही मरने का शौक चढ़ा है जो यहां आए हो शूट करने।”
नील, “अरे भाई! तूने वो कहावत सुनी है, जिस हवेली में हुस्न नजर आए वहां हड्डियां जरूर बिछी होंगी।”
आरव, “ओ हो ब्रो! तू भी ना एक लड़की के नाम से डर रहा है। अबे ये सिर्फ बातें हैं बातें और तेरा नाड़ा इतना ढीला है क्या कि एक भूतनी के सामने खुल जाएगा?”
लेकिन फिर भी अनुष्का को रात में वहां जाना ठीक नहीं लग रहा था। इस पर आरव कहता है,
आरव, “डोंट वरी बेबी, मैं हूँ ना।”
शाम के 6:00 बजे, वो तीनों हवेली पहुँचे। जर्जर दरवाजा, चारों तरफ इतना जाला कि आगे बढ़ना मुश्किल और बिल्कुल घूप अंधेरा।
लेकिन जैसे ही आरव ने पहला कदम अंदर रखा, उसे एक खुशबू आई। बेहद मीठी जैसे किसी औरत के गीले बालों की।
कामिनी, “आओ… आओ।”
आरव, “ये क्या? सुना तुम लोगों ने?”
नील, “क्या?”
आरव, “जैसे कोई लड़की हंसी हो।”
अनुष्का, “वापस चलें क्या?”
आरव, “नहीं, शायद मेरा वहम होगा। चलो शूट की तैयारी शुरू करें।”
पर आरव ने सबको नजरअंदाज किया और कैमरा और लाइट सेट किए और तभी हवेली की ऊपरी मंजिल से काला साया गुजरा।
नील, “भाई देख, ऊपर कोई है।”
आरव, “अबे, यह प्रोजेक्शन हो सकता है या कोई लाइट शैडो। छी यार, अब हर चीज को उससे मत जोड़।”
उन लोगों ने कुछ फोटो क्लिक किए और फिर हवेली के बाहर आकर टेंट लगा कर बैठ गए। रात 10 बजे नील और अनुष्का टेंट में आराम कर रहे थे।
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लेकिन आरव कैमरा लेकर हवेली में अकेला लौट आया।
अनुष्का, “ये आरव अंदर वापस क्यों जा रहा है?”
नील, “शायद कोई इक्विपमेंट भूल गया होगा।”
उधर आरव को हवेली में एक लड़की मिली, कामिनी। सांवला रंग, गीले बाल, लाल चुनरी।
आँखों में कुछ ऐसा जो सीधा मन के भीतर उतरता था।
कामिनी, “तुम आ ही गए। मैं जानती थी।”
आरव, “तुम कौन हो? यहां क्या कर रही हो?”
कामिनी, “मैं यहां रहती हूं और अब से तुम भी यहीं रहोगे। मेरे साथ।”
आरव, “ओह! कोई एक्टिंग कर रही हो क्या? लोकल थिएटर से हो?”
कामिनी, “एक्टिंग नहीं करती मैं, नरक दिखाती हूं।”
आरव, “मतलब?”
कामिनी, “मतलब मैं जानती हूं तुम अपनी प्रेमिका से संतुष्ट नहीं हो। आओ, मैं तुम्हें बताती हूं प्यार क्या होता है। मेरी आँखों में देखो।”
आरव को एक सेकंड के लिए उसकी आंखों में सुर्ख आग दिखी। उसका बदन ठंडा पड़ गया। लेकिन मन फिर भी खींचता चला गया। कामिनी की आंखों में वो जादू था या शायद कोई श्राप।
वो उसे ऊपर कमरे में लेकर गई। नीचे टेंट में अनुष्का सो चुकी थी, लेकिन अचानक उसकी आँख खुली।
उसे किसी औरत की हंसी सुनाई दी, लेकिन यह कोई आम हंसी नहीं थी। ये वही हंसी थी जो वो बचपन में अपने बुरे सपनों में सुनती आई थी।
कामिनी, “आखिर तुम आ गए।”
अनुष्का, “ये कैसे हो सकता है?”
नील, “क्या हुआ?”
अनुष्का, “नील… नील, मुझे यकीन है ये वही… ये वही है, काम पिशाचिनी।”
नील, “सपना देख रही हो क्या?”
अनुष्का, “तुमने वो आवाज नहीं सुनी क्या? अरे शिट, हम लोग सो गए और आरव अभी भी ऊपर है।”
इतने में ऊपर से आरव की चीख सुनाई दी।
आरव, “बचाओ… मुझे बचाओ।”
नीचे टेंट में अनुष्का और नील के पैरों तले जमीन खिसक गई थी।
अनुष्का, “मैंने कहा था उसे, यहां मत आओ। खासतौर पर रात में ना जाना अंदर, लेकिन नहीं माना।”
नील, “अब क्या करें? ऊपर चलें क्या?”
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अनुष्का, “नहीं, मुझे खुद जाना होगा क्योंकि मैं उसे जानती हूं बहुत पहले से।”
उधर आराव हवेली के अंदर एक बिस्तर पर पड़ा था। आँखें लाल, सामने खड़ी थी कामिनी, या यूँ कहें कि काम पिशाचिनी।
अब उसका चेहरा मासूम नहीं बल्कि भयानक था। उसकी गर्दन टेढ़ी, आँखें अंधेरे में जलती हुई और बाल हवा में लहरा रहे थे।
कामिनी, “जानते हो आरव, मर्द जब किसी औरत को सिर्फ उसके शरीर से देखता है तो वो खुद को शिकार बना लेता है।”
आरव, “तो… तू कौन है?”
कामिनी, “मैं वो औरत हूं जिसे हवस की आग में जला दिया गया था। जिसकी चीखें कभी रुकती नहीं। मैं काम पिशाचनी हूं और तू मेरा 100वाँ शिकार।”
कामिनी की आंखें धीरे धीरे काली से लाल होने लगीं। और उसके पीछे बने आइने में आरव ने देखा, उसके शरीर से एक एक करके धुंध जैसी परछाइयां निकल रही थीं। जैसे उसकी आत्मा खींची जा रही हो।
अनुष्का, “आरव… आरव…”
तभी नील भी भागते-भागते उसके पीछे आ गया।
नील, “हम… हम इसे नहीं रोक सकते। वो पिशाचिनी है, इंसान नहीं।”
अनुष्का, “उसे मैं ही रोक सकती हूं।”
नील कुछ कहता, उससे पहले ही लाल रोशनी फूटी।
नील, “तू… तू कौन है?”
अनुष्का, “मैं… मैं भी एक काम पिशाचिनी हूं। बरसों पहले आरव ने अनजाने में मेरा आवाहन किया था।
मैं तभी से उसके साथ हूं। वो तब मात्र 15 साल का था और उस समय से मैं उसकी प्रेमिका बनकर रही हूं।”
आरव, “मैं तो तुम्हें इंसान समझता था।”
अनुष्का, “आरव के साथ रहते-रहते मैं भी खुद को इंसान समझने लगी थी। लेकिन आज शायद वो दिन आ गया है, जब मुझे अपना असली रूप सामने लाना पड़ेगा। मुझे अपने आरव को दूसरे काम पिशाचिनी से बचाना पड़ेगा।”
उधर कमरे में कामिनी आरव को मारने की तैयारी कर चुकी थी।
कामिनी, “कोई आखिरी ख्वाहिश मेरे लाल, जल्दी बता। उसके बाद तेरे दोस्त नील को भी मौत के घाट उतारना है।”
आरव, “नहीं, नहीं ऐसा ना करो। कोई मुझे बचाओ। मैं तो तुम्हारे साथ कुछ भी करना नहीं चाहता था, बस सम्मोहित हो गया था।”
कामिनी, “झूठ, मुझे दिखता है हर दिल का सच। तेरी आँखों में सिर्फ हवस है।”
तभी अनुष्का कमरे में घुसती है। उसके हाथ में अब काले धागे से बंधा लोहे का त्रिशूल होता है।
आरव, “तुम लोग? और अनुष्का?”
नील, “क्या कर रही हो?”
कामिनी, “तुम लोग इसे नहीं बचा सकते।”
अनुष्का, “कामिनी, बहुत हो गया। आज तेरा अंत होगा।”
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कामिनी, “हा हा हा… तू क्या करेगी? आधी औरत, आधी शैतान। ना इधर की ना उधर की।”
अनुष्का, “मैं क्या हूं, उससे फर्क नहीं पड़ता? लेकिन मैं आरव से प्यार करती हूं और उसे बचा कर रहूंगी।”
कामिनी, “गद्दार कहीं की। पहले तुझे ही खत्म कर देती हूं।”
कमरे में तांत्रिक युद्ध शुरू होता है। कामिनी हवा में उड़ती है। उसके चित्कार से खिड़कियां फटने लगती है।
अनुष्का मंत्र पढ़ती है। त्रिशूल से उस पर वार करती है। कामिनी के शरीर से बहुत सी छायां निकलती हैं और एक-एक कर चिल्लाकर जलने लगती है।
जैसे ही अनुष्का कामिनी को मारती है, कामिनी जमीन पर गिरती है और बुदबुदाती है।
कामिनी, “मैंने सिर्फ उन्हीं को मारा जिन्होंने औरतों के जिस्म से खेला। तेरा आरव भी ऐसा ही है और तू काम पिशाचिनी होकर एक इंसान का साथ दे रही है। पछताएगी… पछताएगी तू।”
ये कहते-कहते कामिनी भस्म हो जाती है। हवेली शांत हो जाती है।
आरव, “सब खत्म हो गया, है ना?”
अनुष्का, “हाँ, अब सब ठीक है। चलो यहां से।”
वो लोग शहर आ गए। तीन दिन बाद एक शाम, नील ने आरव से कहा,
नील, “आरव, तुझे तो याद भी नहीं होगा। लेकिन…।”
आरव, “लेकिन क्या?”
नील, “अनुष्का… वो इंसान नहीं है। वो भी एक काम पिशाचिनी है जिसे तूने खुद बुलाया था 15 साल की उम्र में।”
आरव, “क्या बकवास है ये?”
नील, “यही सच है। तभी से वो तेरे साथ है, तेरी गर्लफ्रेंड बनकर। वो शायद तुझसे प्यार भी करती हो, पर है तो वो काम पिशाचनी ही ना। क्या भरोसा?”
आरव के होश उड़ गए। उसकी बातें धीरे-धीरे आरव के ज़हन में उतरने लगी। अनुष्का का चेहरा अब उसके लिए एक पहेली बन चुका था। उसी रात, आरव एक बाबा से मिला।
उन्होंने उपाय बताया।
बाबा, “उसे विवाह का प्रस्ताव दो। जब वो मंडप में तुम्हारे पास बैठे और अग्नि के चारों ओर फेरे लेने को तैयार हो, तभी मैं एक पंडित के रूप में उसे बंद करने वाले मंत्रों का जाप शुरू कर दूँगा।
लेकिन याद रहे, जैसे ही वो समझेंगे कि धोखा हो रहा है, वो भयानक रूप ले लेगी। हिम्मत रखना।”
अगले दिन आरव ने अनुष्का से शादी का प्रस्ताव रखा। अनुष्का चौंकी मगर मुस्कुराई और तुरंत हां कह दी। उसी रात, एक मंदिर में मंडप सजाया गया।
बाबा एक पंडित बनकर बैठे थे और नील पास ही खड़ा था।
बाबा, “ओम मंगलम भगवान विष्णु…।”
आरव, “माफ करना, अनुष्का।”
शादी शुरू हो गई। फूल बरस रहे थे, मंत्र गूंज रहे थे। अनुष्का ने अग्नि के चारों ओर पहला फेरा लिया और तभी…
बाबा, “ओम कालरात्रि स्वाहा। ओम महाविनाशिनी स्वाहा। ओम काम पिशाचिनी बंधनाय नमः।”
अनुष्का, “ये… ये क्या मंत्र है? तुम पंडित नहीं हो। ये शादी नहीं ये… ये चाल है।”
नील, “आरव, इसे पकड़ो।”
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तभी अनुष्का की आँखों से खून टपकने लगा। उसका चेहरा विकृत होने लगा। बाल बिखर गए और अगले ही पल…
अनुष्का, “धोखा… आरव तुमने भी?”
आरव, “अबे, पकड़ इसे। यह बच ना पाए।”
लेकिन अनुष्का ने एक झटका मारा और नील हवा में उड़कर सीधा अग्निकुंड में जा गिरा। नील की भयानक चीखों के बीच उसका शरीर जलने लगा और अग्नि से काले धुएं की लपटें उड़ने लगी।
बाबा, “ओम छिनस्ता चतुर्भुजा कपाल दंड धारणी स्वाहा।”
अनुष्का, “बाबा… मैं तुझे चीर दूँगी। तुझे नर्क से भी गहरी पीड़ा होगी।”
आरव, “अनुष्का, मत करो। प्लीज मत…।”
अनुष्का, “मैं तुम्हें नहीं मार सकती, आरव क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूं। पर ये बाबा…।”
उसके आँसू पहली बार इंसान जैसे हुए हैं। पर उसका शरीर अब भी दहक रहा था। आखिर बाबा ने उसे मंत्रों से बांध लिया।
बाबा, “अब समय है।”
अनुष्का, “एक काम पिशाचिनी प्यार कर सकती है। वफादार हो सकती है। लेकिन इंसान… इंसान कभी वफादार नहीं होता। मैंने गलती कर दी आरव, एक इंसान से प्यार करके।”
फिर धरती दहक उठी। अनुष्का की देह एक पल में राख में बदल गई। हवा में उसकी चीखें गूंजी और फिर सब शांत हो गया।
आरव की आँखों से आँसू बह रहे थे, पछतावे से भरे हुए। वो जानता था, उसने एक राक्षसी को नहीं, एक प्रेमिका को खो दिया था।
दोस्तो ये Horror Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!