खेत में खजाना | KHET ME KHAJANA | Moral Story | Hindi Kahani | Achhi Achhi Kahani | Hindi Moral Stories

व्हाट्सएप ग्रुप ज्वॉइन करें!

Join Now

टेलीग्राम ग्रुप ज्वॉइन करें!

Join Now

हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” खेत में खजाना ” यह एक Moral Story है। अगर आपको Moral Stories, Hindi Stories या Hindi Moral Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।


किसी गाँव में एक भोला नाम का लड़का अपनी माँ और बीवी के साथ रहता था।

वो अपने नाम की तरह ही बोला था। उसे गाँव के सभी लोग पागल बना दिया करते थे।

कमला, “अरे! देखो बारिश का मौसम हो गया है। पिछली बार भी तुमने खेत में ज्यादा खेती नहीं की थी।”

भोला, “अरे कमला! तुम ऐसे क्यों बोल रही हो? तुम्हें तो पता है कि मैंने पिछले साल कितनी मेहनत की थी?”

कमला, “हाँ, मेहनत तो की थी, लेकिन दूसरों के खेतों में। अपने खेत में तो तुमने सही काम ही नहीं किया था।”

माँ, “अरे बहू! तू इसे क्यों गुस्सा कर रही है? तुझे तो पता है न की ये अपने नाम की तरह ही कितना भोला है? और वैसे भी सबको सबका नसीब का ही मिलता है।”

कमला, “मां जी, आप तो चुप ही रहिये। आप तो इन्हें कभी कुछ कहती नहीं है। गाँव के सभी लोग इन्हें पागल बनाते रहते हैं और ये पागल बन जाते है।”

भोला, “माँ, मैं क्या करूँ? मुझसे किसी की तकलीफ देखी नहीं जाती है।”

कमला, “हाँ, तो तुम दूसरों के चक्कर में अपना नुकसान कर लो है। हैं न?”

भोला, “ठीक है, ठीक है, तुम गुस्सा मत करो। मैं अभी खेत में जाकर खेती करता हूँ।”

भोला खेती करने के लिए निकल जाता है।

भोला, “अरे भोला जल्दी जल्दी चलकर खेती कर ले, नहीं तो कमला मेरा जीना हराम कर देगी।”

भोला यह कहता हुआ खेत की तरफ जा ही रहा होता है कि तभी उसका बड़ा भाई धर्मेंद्र उसे पीछे से आवाज देकर रोकता है।

धर्मेंद्र, “अरे भोला… भोला! अरे सुन तो जरा, कहां जा रहा है? अरे सुन तो भोला।”

भोला पीछे मुड़कर देखता है, तो उसके पीछे पीछे धर्मेंद्र भी आ रहा होता है। भोला उसे देख कर रुक जाता है।

धर्मेंद्र, “अरे भोला! इतनी जल्दी जल्दी कहा भागा जा रहा है? तुझे मैं कितनी देर से आवाज दे रहा हूँ?”

भोला, “अरे धर्मेन्द्र भाई! क्या हुआ? आप मुझे क्यों बुला रहे थे?”

धर्मेंद्र, “अरे कुछ नहीं रे! वो तेरी भाभी बीमार है और मुझे उसे डॉक्टर के यहाँ ले कर जाना है।”

भोला, “अरे भैया! क्या हुआ? भाभी को ज्यादा परेशानी है तो बताओ, मैं तुम्हारे घर कमला को भेज देता हूँ। वो भाभी का ध्यान रख लेगी।”

धर्मेंद्र, “अरे! नहीं नहीं, इसकी जरूरत नहीं है। तू क्यों कमला को परेशान कर रहा है? वो बेचारी वैसे ही पूरे दिन घर का काम करती रहती है।”

भोला, “तो भैया बताओ फिर मुझे क्यों रोका? मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?”

धर्मेंद्र, “फिर क्या आज तू मेरे खेत में जाकर खेती कर सकता है क्या?”

भोला, “लेकिन भैया में तो आज खुद अपने खेत में खेती करने जा रहा हूँ। अगर आज मैंने अपने खेत में खेती नहीं की, तो कमला मुझे घर में नहीं घुसने देगी।”

धर्मेंद्र, “अब तू अपनी बीवी की ही सुनेगा है न। भाई तो तेरे लिए कुछ है ही नहीं।”

खेत में खजाना | KHET ME KHAJANA | Moral Story | Hindi Kahani | Achhi Achhi Kahani | Hindi Moral Stories

भोला, “नहीं भैया वो बात नहीं है।”

धर्मेंद्र, “अरे देख ले रे, कल कर लीओ अपने खेत में खेती। अगर आज तूने मेरे खेत में खेती नहीं की तो मुझे बहुत नुकसान हो जाएगा।”

भोला, “ठीक है भैया, मैं पहले आपके खेत में खेती कर देता हूँ।”

भोला उदास होकर धर्मेंद्र के खेत में खेती करने चला जाता है।

धर्मेंद्र, “अब आएगा ना मजा। अब वो मेरे खेत में खेती करेगा और मैं जाऊँगा अपनी बीवी के साथ घूमने।”

धर्मेंद्र अपने घर जाता है।

धर्मेंद्र, “कहां हो बाहर आओ?”

सुनीता, “अरे! क्या हुआ? क्यों गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहे हो? धीरे भी सुनाई देता है मुझे।”

धर्मेंद्र, “अरे! मेरी सुनीता तू गुस्सा क्यूँ हो ही है।”

सुनीता, “मैंने तुमसे कहा था न की मुझे पास के गाँव में घुमा लाओ।”

धर्मेंद्र, “अरे. गुस्सा क्यों होती है? चल मैं तुझे घूमने के लिए जुगाड़. करके आया हूँ।”

सुनीता, “ऐसा कौन सा जुगाड़ करके आए हो, जो इतना खुश हो रहे हो?”

धर्मेन्द्र सुनीता को सारी बात बता देता है।

सुनीता, “अरे! वो भूला तो है ही, मूर्ख।”

उधर बेचारा भोला गर्मी में धर्मेन्द्र के खेत में खेती करता है।

भोला, “आज तो काम करते करते बहुत थक गया हूँ। शाम भी हो गई है, अब घर चलता हूँ। कमला भी मेरा इंतज़ार कर रही होगी।”

शाम को धर्मेद्र अपनी बीवी को घुमा कर लेकर आ रहा होता है, तो धर्मन्द्र सुनीता से बोलता है।

धर्मेंद्र, “अरे सुनीता! शाम हो. गई है। मैं ज़रा खेत में देख कर आता हूँ की उस भोला ने कितना काम किया है?”

सुनीता, “ठीक है आप जाइए।”

शाम को भोला खेती का काम खत्म कर के अपने घर जा ही रहा होता है की तभी सामने से धर्मेद्र आता है।

भोला, “अरे धर्मेन्द्र भाई! आ गये आप और अब भाभी कैसी हैं? डॉक्टर ने क्या कहा, क्या हुआ है उन्हें?”

धर्मेंद्र, “अरे अरे! बस वो तेरी भाभी को थोड़ी सी थकान हो गई है, इसलिए उसे चक्कर आ रहे थे।”

भोला, “अच्छा अच्छा अच्छा, ठीक है भैया, मैंने आपका काम कर दिया है, मैं घर जा रहा हूँ, कमला मेरा इंतज़ार कर रही होगी।”

धर्मेंद्र, “तेरा बहुत बहुत धन्यवाद भोला जो तूने मेरा काम कर दिया।

भोला, “अरे भैया! कैसी बात कर रहे हैं आप? अगर मैं आपके काम नहीं आऊंगा, तो भला कौन आयेगा? आपका छोटा भाई हूँ।”

धर्मेंद्र, “हां हां भोला तू सही कह रहा है। ठीक है, ठीक है, तू जा जा तू कल तुझे फिर पागल बना कर अपना काम निकलवाउंगा हां।”

भोला, “अरे अरे भैया! कहाँ खो गए आप?”

धर्मेंद्र, “अरे! कुछ नहीं, कुछ नहीं, जा जा घर जा।”

खेत में खजाना | KHET ME KHAJANA | Moral Story | Hindi Kahani | Achhi Achhi Kahani | Hindi Moral Stories

भोला अपने घर की तरफ निकल जाता है, और उसे जाता देख धर्मेंद्र हंसता है। भोला घर पहुँच कर घर के बाहर ही खड़ा हो जाता है।

भोला, “क्या करूँ क्या करूँ, घर के अन्दर कैसे जाऊँ? कमला मुझे आज फिर सुनाएगी।”

भोला की माँ भोला को घर के बाहर खड़े हुए देख लेती है।

माँ, “अरे ओ भोला! तू बाहर क्यों खड़ा है? घर के अन्दर आ जा।”

भोला, “आ रहा हूं, मां।”

भोला जैसे ही घर के अंदर जाता है, तभी कमला भोला से कहती हैं।

कमला, “हाँ जी, क्या हुआ? आज आपने खेती की?”

भोला, “वो वो खेती तो मैंने की, लेकिन वो मैंने अपने खेत में खेती नहीं की।”

कमला, “क्या..? आपने आज भी खेती नहीं की?”

भोला, “अरे कमला! वो आज धर्मेंद्र भैया मिले थे, सुबह तो बोल रहे थे की भाभी की तबियत खराब है,

इसलिए वो उन्हें लेकर डॉक्टर के यहाँ गए थे, इसलिए उन्होंने मुझसे कहा की मैं उनके खेत में जाकर खेती करूँ।”

कमला, “देखा माँ, इनको फिर से धर्मेन्द्र भाई साहब ने मूर्ख बना दिया। वो आज भाभी के साथ पास वाले गाँव में घूमने गए थे।”

भोला, “नहीं नहीं, कमला। तुम्हें कोई गलत फैमी हुई है। भैया मुझसे झूठ क्यों बोलेंगे?”

माँ, “अरे बोला! तुझे कितनी बार कहा है कि उस चालाक इंसान की बातों में मत आया कर। वो तेरे भोलेपन का फायदा उठाता है।”

भोला, “लेकिन माँ, वो तो मेरे बड़े भाई हैं। वो मेरे साथ ऐसा क्यों करेंगे?”

माँ, “बेटा, वो तेरा भाई है। लेकिन तुझमें और उसमें जमीन आसमान का फर्क है। वो बहुत शातिर इंसान है।”

भोला, “कमला, तुम परेशान मत हो। मैं कल ही खेत में जाकर खेती करूँगा।”

कमला, “हे भगवान! कैसे मूर्ख इंसान से मेरी शादी करवाई है? मेरे तो करम ही फूट गए।

सुनो, अगर इस बार अच्छी खेती नहीं हुई तो मैं इस घर को छोड़कर अपने पिताजी के घर चली जाऊँगी।”

भोला, “माँ, मैं ऐसा क्यूँ हो? क्या कभी मैं अपने जीवन में कुछ अच्छा कर पाऊंगा क्या? मैं कभी तुम्हें और कमला को खुश रख पाउँगा?”

माँ, “बेटा भोला, तू परेशान मत हो। यह सब तो जीवन में चलता ही रहेगा। और हाँ, हर चीज का समय होता है।

बेटा, जब समय आएगा तो सब ठीक हो जाएगा। और हाँ, तू कभी भी पैसों के पीछे मत भागना।

बस, तू सही रास्ते पर चलना। यह ऊपर वाला है न, ये अच्छों के साथ कभी गलत नहीं करता। तू बस उस भगवान पर भरोसा रखना।”

भोला, “माँ आप सच बोल रही है, सच में ऐसा ही होगा।”

अगले दिन भोला अपने खेत में खेती करने जा ही रहा होता है कि रास्ते में उसे धर्मेंद्र रोक लेता है।

धर्मेंद्र, “अरे अरे भोला! इतनी जल्दी जल्दी कहां जा रहा है? अरे! सुन न, क्या तू आज भी मेरे खेत में खेती कर सकता है?

खेत में खजाना | KHET ME KHAJANA | Moral Story | Hindi Kahani | Achhi Achhi Kahani | Hindi Moral Stories

क्या है वो न तेरी भाभी को उस डॉक्टर के इलाज से फर्क नहीं पड़ रहा, तो मैं उसे आज दूसरे डॉक्टर को दिखाने ले जा रहा हूँ।”

भोला, “नहीं भैया, रहने दो। आपने मुझसे कल भी झूठ बोला था की भाभी की तबियत खराब है।

लेकिन मुझे कमला ने बताया की आप कल भाभी को लेकर दुसरे गाँव घूमने के लिए लेकर गए थे।”

धर्मेंद्र, “अरे! नहीं नहीं रे पागल, भोला तेरी बीवी झूठ बोल रही है। तेरी भाभी की सच में तबियत खराब है। अब तू अपने बड़े भाई पर शक करेगा।”

भोला, “नहीं भैया, वो बात नहीं है। अगर आज मैंने खेती नहीं की तो कमला मुझे घर से बाहर निकाल देगी।”

धर्मेंद्र, “वो तुझे ऐसे कैसे घर से निकाल सकती है? उसकी इतनी हिम्मत है?”

भोला, “नहीं भैया, वो अकेली नहीं है। माँ भी उसी के साथ है। और उसने मुझे साफ़ साफ़ बोल दिया है

की अगर इस बार खेतों में अच्छी फसल नहीं हुई तो वो मुझे छोड़कर अपने पिताजी के घर चली जाएगी।”

धर्मेंद्र, “अरे रे माँ, माँ भी उसके साथ है? क्या यार जा तू जाकर अपने खेत में खेती कर।”

भोला वहाँ से खेती करने अपने खेत में चला जाता है।

धर्मेंद्र, “अरे रे! मेरा तो पूरी योजना ही खराब हो गयी, अब मुझे खुद ही खेत में जाकर काम करना पड़ेगा।”

ऐसा कहकर धर्मंद्र वहाँ से चला जाता है।

भोला, “हे भगवान! मैं ऐसा क्या करूँ? कब तक अपनी किस्मत को रोऊं? मैंने आज तक अपनी माँ और बीवी के लिए कुछ अच्छा नहीं किया है। भगवान जी, आप मुझ पर अपनी कृपा कीजिये।”

ऐसा कहकर भोला अपने खेत से निकलकर घर जा ही रहा होता है कि वैसे उसी के खेत में ही वो किसी चीज से टकरा कर गिर जाता है।

भोला, “रे! बहुत तेज लग गई। शायद आज मैंने धर्मेन्द्र भैया के काम को मना कर दिया इसलिए मेरे लग गई।”

भोला जैसे ही उठता है, उसे 1 चमकती हुई चीज दिखाई देती है।

भोला, “ये…ये क्या चीज है, जो इतनी चमक रही है?”

बोला उस चमकती हुई चीज को निकालने के लिए उस जगह को खोदता है।

भोला, “अरे…अरे! ये इतना बड़ा पीतल का घड़ा..? इसमें, इसमें आखिर है क्या?”

भोला जैसे ही उस पीतल की घड़े का ढक्कन खोलता है तो देखता है कि उसमें बहुत सारे सोने की मोहरें होती है।

भोला, “अरे! मेरी तो किस्मत ही खुल गई है। भगवान तेरा बहुत बहुत शुक्रिया, तूने आज मेरी किस्मत खोल दी।”

भोला भागता हुआ उस पीतल के घड़े को लेकर घर में जाता है।

कमला, “क्या हुआ, तुम आज फिर से जल्दी आ गए?”

भोला, “अरे अरे कमला! देखो इसे देखो मेरे हाथ में यह क्या है?”

माँ, “अरे बेटा! तू यह क्या लेकर आ गया?”

भोला, “माँ तुम सही कहती है कि बस पर भरोसा रखो। वो सच्चे लोगों की मदद जरूर करते है। देखो माँ, आज भगवान ने मेरी मदद की है।”

कमला, “क्या बोले जा रहे हो? क्या है इस घड़े में और तुम्हें कहाँ मिला?”

खेत में खजाना | KHET ME KHAJANA | Moral Story | Hindi Kahani | Achhi Achhi Kahani | Hindi Moral Stories

भोला, “लो कमला तुम इसे खोल कर तो देखो।”

कमला उस पीतल के घड़े को खोल कर देखती है तो वो घड़ा पूरा सोने की मोहरों से भरा होता है।

कमला, “अरे अरे! ये सोने की मोहरों से भरा घड़ा तुम्हें मिला कहां?”

भोला कमला और अपनी माँ को सारी बात बता देता है।

माँ, “देखा बेटा, मैंने कहा था ना की भगवान सच्चे और अच्छे लोगों की मदद जरूर करता है।”

भोला, “हाँ माँ, आज मुझे भगवान पर सच में भरोसा हो गया।”


दोस्तो ये Moral Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!


Leave a Comment

लालची पावभाजी वाला – Hindi Kahanii ईमानदार हलवाई – दिलचस्प हिंदी कहानी। रहस्यमय चित्रकार की दिलचस्प हिंदी कहानी ससुराल में बासी खाना बनाने वाली बहू भैंस चोर – Hindi Kahani