हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” बेवकूफ किसान ” यह एक Hindi Story है। अगर आपको Hindi Stories, Hindi Kahani या Achhi Achhi Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।
चंदनपुर के राजा खड़क सिंह बड़े ही लालची किस्म के इंसान हैं। उन्हें हर समय सिर्फ अपने खजाने में पैसे इकट्ठे करने की धुन लगी रहती है। एक सुबह…
राजा, “खजाना और खजाना!”
महारानी, “क्या हुआ महाराज? आप ऐसे क्यों चिल्ला रहे हैं?”
राजा, “महारानी! आज मैंने सपने में खजाने की खोज की। अब हम और अमीर हो जाएंगे।”
महारानी, “कहां है वो खजाना? और आप पहले से ही राजा हो और कितना अमीर होना चाहते हैं?”
राजा, “बताता हूं… चलो दरबार में।”
महाराज दरबार में जाते हैं। उनके साथ महारानी भी होती हैं और वह सिपाहियों को बुलाते हैं।
राजा, “सिपाहियों! मैंने अपने राज्य में नए खजाने की खोज की है। तुम जाओ और तुरंत उस खजाने को निकालकर हमारे पास लाओ।”
सिपाही, “महाराज! कहां है वह खजाना?”
राजा, “हमारे राज्य के जिस घर के बाहर आंगन में दो दरवाजे हों, एक पेड़ हो, उस पेड़ से बकरी बंधी हुई हो, दूसरी तरफ घास काटने की मशीन हो… बस उसी जगह को खोदना और तुम्हें वहां पर छुपा हुआ खजाना मिलेगा।”
महाराज सिपाहियों को एक कागज देते हैं।
सिपाही, “महाराज! माफी हो, लेकिन क्या वह हमें अपना घर खोदने देंगे?”
राजा, “गुस्ताख! यह लो शाही फरमान और उनको बोलना यह शाही फरमान महाराज ने खुद लिखा है। जो इस काम के बीच में आए उसे गिरफ्तार करके हमारे पास ले आना।”
महारानी, “महाराज! मुझे लगता है यह सही नहीं है। किसी का घर ऐसे क्यों खोदना?”
राजा, “महारानी! आप हमारी महारानी होकर ऐसी बात कर रही हैं? सिपाहियों! तुरंत हमारे आदेश का पालन किया जाए।”
सिपाही महाराज का दिया हुआ फरमान और नक्शा लेकर राज्य में निकल पड़ते हैं। बहुत लोगों से पूछते हैं लेकिन किसी को उस घर के बारे में कुछ नहीं पता होता। तभी बाजार में असलम और मुनव्वर पर सिपाहियों की नजर पड़ती है।
सिपाही, “सुनो! क्या तुम्हें इस घर के बारे में पता है जिस घर का नक्शा इस कागज पर बना है?”
असलम, “अरे हां! यह तो शमशेर का घर है।”
मुनव्वर, “हां-हां! सही कहा असलम भाई, यह उस शमशेर का ही घर है।”
सिपाही, “ठीक है, तुम हमें वहां ले चलो।”
मुनव्वर, “लेकिन क्या बात है सिपाही जी? यह तो बताइए।”
सिपाही, “महाराज ने हमें उस घर को खोदने का आदेश दिया है।”
मुनव्वर, “नहीं-नहीं! मैं नहीं जाऊंगा। वह शमशेर तो बड़ा ही सरफिरा है। अगर मैं गया आपके साथ तो वो मुझे बहुत मारेगा।”
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सिपाही, “तुम चुपचाप हमारे साथ चलो! हमारे पास राजा की शाही फरमान है। जो इस काम में रुकावट डालेगा उसे तुरंत गिरफ्तार करने का हुक्म भी है।”
असलम और मुनव्वर राजा के फरमान की बात सुनकर सिपाहियों के साथ शमशेर के घर जाते हैं।
वहां शमशेर की मां और उसकी पत्नी अपने आंगन में बैठी होती हैं। चौखट पर पहुंचकर सिपाही राजा के दिए नक्शे को खोलते हैं।
सिपाही, “दो दरवाजे… एक पेड़… उस पेड़ से बंधी हुई बकरी और हां, दूसरी तरफ घास काटने की मशीन। बिल्कुल सही! यही घर है।”
शमशेर की मां, “कौन हो तुम? और ऐसे कैसे हमारे घर के अंदर घुसे चले आ रहे हो?”
सिपाही, “हम राजा के सिपाही हैं और राजा का फरमान लेकर आए हैं।”
शमशेर की पत्नी, “राजा का फरमान? कैसा फरमान?”
शमशेर की मां, “हे भगवान! मैं तो इस लड़के से परेशान हो चुकी हूं। रोज कोई ना कोई बखेड़ा खड़ा कर ही देता है।”
सिपाही, “अरे चुप करो तुम दोनों! हम किसी शमशेर को नहीं जानते। राजा जी ने सपने में तुम्हारे घर में गड़े हुए खजाने का पता लगाया है।
इसीलिए उन्होंने शाही फरमान जारी किया है तुम्हारे घर को खोदने का।”
शमशेर की मां, “हे राम जी! क्या जुल्म है यह? राजा है कि राक्षस!”
सिपाही, “अपनी जुबान को लगाम दे, नहीं तो हम तुझे गिरफ्तार कर लेंगे!”
शमशेर की पत्नी, “अरे सिपाही जी! इसे माफ कर दीजिए ना… लेकिन यह कहां का न्याय है कि आप हमारा घर खोदने आए हैं?”
सिपाही, “तुम दोनों किनारे चुपचाप बैठ जाओ! और यह राजा का शाही फरमान है।
और साथ ही राजा ने यह भी फरमान जारी किया है कि जो इस खुदाई के काम में बाधा डाले उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाए।”
राजा के फरमान के डर से शमशेर की मां और उसकी पत्नी एक किनारे बैठ जाते हैं और सिपाही घर के अंदर खुदाई का काम शुरू कर देते हैं।
शमशेर की मां, “ऊपर वाले! यह कैसी अंधेर नगरी है? राजा तो अपनी प्रजा का बच्चों की तरह ध्यान रखता है
और यह राजा अपनी प्रजा का खून पीने पर तुला है। यह बड़ा लालची राजा है।”
सिपाही पूरे कमरे की खुदाई कर देते हैं पर उन्हें वहां कुछ नहीं मिलता।
सिपाही, “अरे भाई! हमने तो पूरा कमरा ही खोद दिया लेकिन यहां तो कोई खजाना नहीं मिला।”
सिपाही, “कोई बात नहीं! इन दीवारों को गिराते हैं, शायद इन दीवारों में छुपा हो।”
फिर वह सब मिलकर दीवारों को तोड़ना शुरू करते [संगीत] हैं। लेकिन दीवारों में भी कोई खजाना नहीं मिलता।
और दीवारों को खोदने की वजह से घर की छत उनके ऊपर ही गिरना शुरू हो जाती है। वो किसी तरह अपनी जान बचाकर भागते हैं।
सिपाही, “बाल-बाल बच गए हम! वरना इस छत के नीचे ही दबकर मर जाते। चलो अब आंगन की खुदाई शुरू करते हैं।”
सिपाही, “मुझे तो लगता है कि बुढ़िया और इसकी बहू दोनों सही कह रहे हैं, यहां कोई खजाना नहीं है।”
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सिपाही, “लगता तो मुझे भी ऐसा ही है भाई! लेकिन क्या करें राजा का फरमान है। अगर पूरा नहीं किया तो वो पागल तो हमें ही जेल में डाल देगा। चलो-चलो जल्दी आंगन की खुदाई शुरू करते हैं।”
थोड़ी ही देर में शमशेर का पूरा घर खोदा जा चुका था। दीवारें, छत सब कुछ टूट चुकी थी। वहां सिर्फ मलबा ही मलबा था।
सिपाही, “ए बुढ़िया! हम जा रहे हैं। हमें यहां कोई खजाना नहीं मिला।”
सिपाही वहां से खाली हाथ ही राजमहल वापस चले जाते हैं। शमशेर अपने घर वापस आता है साथ ही वह अपनी मां और पत्नी को रोते चिल्लाते हुए पाता है।
शमशेर, “अरे क्या हुआ? ऐसे क्यों रो रही हो? और हमारे घर की यह हालत किसने की?”
शमशेर की मां, “कहां था तू? हम तो लुट गए… बर्बाद हो गए! कम वक्त राजा के सिपाही आए थे राजा का शाही फरमान लेकर।”
शमशेर, “कैसा फरमान?”
शमशेर की पत्नी, “अरे बेवकूफ! हमारे घर को तोड़ने का शाही फरमान लेकर आए थे राजा के सिपाही। पूरे घर को तहस-नहस करके चले गए।”
शमशेर, “लेकिन ऐसा क्यों किया? तुमने पूछा नहीं?”
शमशेर की मां, “पूछा था। उन्होंने कहा कि उस राजा को हमारे घर के नीचे दबे खजाने का सपना आया है।
हमने उन्हें रोकने की कोशिश की तो हमें ही बातें सुनाई और तो और हमारे मोहल्ले के लोग भी उनके साथ थे।”
शमशेर, “तो क्या खजाना मिला?”
शमशेर की पत्नी, “अगर खजाना होता तभी तो मिलता!”
शमशेर की मां, “तू रो मत मां… चलो हम यहां से किसी दूसरे राज्य में चलते हैं। हमें नहीं रहना यहां।”
शमशेर, “तुम दोनों एक बात कान खोल कर सुन लो। ना तो मैं कहीं जाऊंगा और ना किसी से भीख मांगूंगा। जिन्होंने मेरा घर गिराया है वही मेरा घर ठीक करेंगे।”
शमशेर की मां, “तू तो पागल हो गया है… पागल!”
दूसरी तरफ राजमहल में रानी उदास बैठी थी।
महारानी, “महाराज! आपने अपने खजाने के लिए किसी गरीब का घर तुड़वा दिया।”
राजा, “महारानी! हमें इस बात का कोई अफसोस नहीं है। आखिरकार हम यहां के राजा हैं।”
महारानी, “राजा आप कैसे हैं? वो आपकी प्रजा है, आपके बच्चों के बराबर! क्या आपको थोड़ा भी दर्द नहीं हो रहा?”
राजा, “महारानी! अगर हम ऐसी सोच सोचे तो हमारा राज्य कैसे चलेगा? हमें इस बात का थोड़ा भी अफसोस नहीं है।”
और वह गुस्से में वहां से चले जाते हैं। महारानी मन में कहती हैं, “ना जाने उन गरीबों पर क्या बीत रही होगी।”
दूसरी तरफ शमशेर के घर शमशेर जलेबी लेकर आता है।
शमशेर, “मां! यह ले जलेबी खा।”
शमशेर की मां, “ये क्या उठा लाए हो?”
शमशेर, “दिखता नहीं? जलेबी है जलेबी!”
शमशेर की मां, “बेटा! ऐसा नहीं करते, हमें पैसे बचाने होंगे। पैसा बचाकर ही हम अपना घर बना पाएंगे।”
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शमशेर, “यही जलेबी हमारा घर बनवाएगी! तुम लोग फिक्र मत करो।”
शमशेर की पत्नी, “सुन लो इनका पागलपन! ये जलेबी हमारा घर बनाएगी?”
शमशेर, “अरे तू क्यों नहीं समझता है? हमें घर को बनाने के लिए पैसे जोड़ने होंगे।”
शमशेर, “मैं जोडूंगा! पैसे भी जोड़ूंगा और घर भी बनेगा। लेकिन एक बात मेरी साफ-साफ सुन लो… जिसने यह घर तोड़ा है वही हमें फिर से यह घर बनवा कर देगा।”
मां गुस्से में अंदर चली जाती है। शमशेर जलेबी को थाली में रखकर घर के बाहर छोड़ देता है। थोड़ी देर में उस पर बहुत सी मक्खियां आ जाती हैं।
शमशेर, “आ गए तुम! मेरे घर को तुड़वाने वाले और मेरा नया घर बनाने वाले।”
शमशेर दो-चार मक्खियों को उठाकर डब्बे में डालता है और उसे लेकर राजमहल जाता है।
सिपाही, “महाराज! यही है वह शमशेर जिसका हमने घर तोड़ा है।”
राजा, “लगता है यह मुआवजा मांगने आया है। आने दो इसे! अगर इसने मुआवजा मांगा तो हम इसका सर कलम कर देंगे।”
शमशेर, “महाराज की जय हो! आपको हमारा सलाम है।”
राजा, “हां शमशेर! बताओ क्या शिकायत लेकर आए हो?”
शमशेर, “महाराज! मेरे घर में चोर घुस गए। पूरे घर की जमीन को खोद कर उसे गिरा डाला।
मैंने उनमें से कुछ चोरों को तो पकड़ लिया लेकिन कुछ भाग गए महाराज!
आप उन बचे हुए चोरों को पकड़ने का फरमान जारी कीजिए ताकि मैं उन चोरों को पकड़ सकूं।”
राजा, “हां-हां! हम फरमान जरूर देंगे। लेकिन पहले तुम पकड़े हुए चोरों को तो दिखाओ।”
शमशेर, “महाराज! इनको तो मैंने मार दिया और बाकी भाग गए।”
राजा मन में कहते हैं, “यह मक्खियों को चोर बता रहा है? बड़ा ही बेवकूफ आदमी है। क्या ऐसे बेवकूफ भी रहते हैं हमारे राज्य में?”
शमशेर, “महाराज! क्या आप मेरे साथ न्याय करेंगे? मुझे उन चोरों को मारने की इजाजत देंगे?”
राजा, “हम देंगे! मगर यह तो मक्खियां हैं।”
शमशेर, “जो भी हो महाराज! मुझे इन्हें सजा देने का फरमान चाहिए।”
राजा, “ठीक है शमशेर! हम अभी शाही फरमान जारी करते हैं ताकि तुम चोरों को पकड़ सको… जिंदा या मुर्दा।”
महाराज शाही तख्ती पर फरमान लिखते हैं और शमशेर को देते हैं।
शमशेर, “अब तो खुश हो! महाराज की जय हो! आप बड़े ही न्याय प्रिय हैं।”
शमशेर, “लेकिन एक बात बताइए महाराज! अगर किसी ने मेरी शिकायत करी तो?”
राजा, “अगर किसी ने तुम्हारी शिकायत करी तो हम उससे 100 उठक-बैठक लगवाएंगे!”
शमशेर, “महाराज की जय हो! महाराज की जय हो!”
शमशेर के जाने के बाद राजा कहते हैं, “सेनापति जी! क्या हमारे राज्य में ऐसा भी मूर्ख रहता है?”
दरबार में सब महाराज की बात सुनकर हंसने लगते हैं। दूसरी तरफ शमशेर अपने घर जाता है और कुछ ढूंढने लगता है।
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शमशेर की मां, “तू क्या ढूंढ रहा है? बोलता क्यों नहीं? चल रोटी खा ले।”
शमशेर, “रोटी बाद में खाऊंगा! पहले मुझे मेरा काम करने दे।”
और वह अंदर से एक बड़ा सा डंडा लेकर आता है।
शमशेर की पत्नी, “अरे तू यह लेकर कहां जा रहा है?”
शमशेर, “कुछ नहीं कर रहा हूं! तुम दोनों चुपचाप घर में बैठो। मैं जा रहा हूं अपना बदला लेने।”
और वो डंडा लेकर मक्खियों को मारता हुआ असलम की दुकान पर पहुंच जाता है।
असलम, “क्या चाहिए शमशेर?”
शमशेर असलम को चुप रहने का इशारा करता है और डंडे से उसकी दुकान पर रखे सामान पर बैठी मक्खियों को मारने लगता है। साथ ही सामान भी तोड़ता जाता है।
असलम, “यह क्या कर रहा है? तेरे बाप का माल है जो तू सामान तोड़ रहा है?”
शमशेर, “तू चुप कर! यह राजा का फरमान है। कुछ बोलना मत।”
शमशेर असलम की पूरी दुकान में तोड़फोड़ कर देता है। असलम महाराज के दरबार में जाता है शमशेर की शिकायत लेकर।
राजा, “आज की कार्यवाही शुरू की जाए।”
सेनापति, “महाराज! यह असलम अपनी गुहार लेकर आया है।”
राजा, “बोलो असलम! क्या गुहार है तुम्हारी?”
असलम, “महाराज! मैं शमशेर की शिकायत लेकर आया हूं।”
राजा, “शमशेर को हमारे सामने लाया जाए।”
सिपाही शमशेर को पकड़कर दरबार में लेकर आते हैं।
राजा, “बोलो असलम! क्या गुहार है तुम्हारी?”
असलम, “महाराज! इस शमशेर ने मेरे दुकान का सारा सामान तोड़-फोड़ दिया है।
और जब मैंने इससे बोला तो कहता है यह राजा का फरमान है, वह भी शाही! महाराज क्या सच में आपने ऐसा फरमान दिया है?”
राजा, “शमशेर! क्या बात है बताओ।”
शमशेर, “महाराज! मेरी कोई गलती नहीं है। यह नाइंसाफी है, मैं अपना काम छोड़कर आया हूं। मैं चोरों को मार रहा था
और मैंने इसके दुकान में चोरों को बैठे हुए देखा और उन्हें मारना शुरू किया। क्योंकि महाराज आपने ही फरमान में लिखा है कि चोरों को जिंदा या मुर्दा कैसे भी पकड़ो।”
शमशेर, “तो मैं उन्हें डंडे से मार रहा था और यह बीच में आया। जब मैंने इससे कहा कि यह महाराज का शाही फरमान है तो इसने कहा— ‘महाराज के शाही फरमान की ऐसी की तैसी’।”
राजा, “गुस्ताख! तुमने हमारे शाही फरमान के बारे में गलत शब्द कहे? सिपाहियों! इस असलम से 100 उठक-बैठक लगवाए जाएं।”
असलम, “महाराज! मैंने यह नहीं कहा था, यह झूठ बोल रहा है।”
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राजा, “गुस्ताख! अपनी जबान बंद करो। सिपाहियों! हमारे हुक्म की तामील हो। और शमशेर को बाइज्जत बरी कर दो।”
शमशेर बड़ा खुश होता है और अपना डंडा लेकर निकल पड़ता है। चौक पर शमशेर को उस दिन सिपाहियों के साथ आए हुए दो लोग रामू और हेमंत दिखते हैं।
रामू, “अरे शमशेर भाई! क्या बात हो गई? यह डंडा लिए क्यों घूम रहे हो?”
शमशेर, “कुछ नहीं भाई! चोरों की तलाश में निकला था।”
तभी हेमंत के कंधे पर मक्खी बैठी दिखाई देती है। वह जोर से दो डंडे लगाता है और मक्खी को मार देता है।
उसे उठाकर डब्बे में रख लेता है। फिर शमशेर एक जोरदार डंडा रामू के हाथ पर लगाता है।
रामू, “अरे शमशेर! यह क्या कर रहा है?”
शमशेर मक्खी उठाता है, डब्बे में रखता है और आगे बढ़ जाता है। रामू और हेमंत शमशेर की शिकायत लेकर राज दरबार में जाते हैं।
रामू और हेमंत, “महाराज की जय हो! हम शमशेर के खिलाफ शिकायत लेकर आए हैं।”
राजा, “यह समझ में नहीं आता कि जब हमने शाही फरमान जारी कर रखा है तो बार-बार शिकायत लेकर क्यों आते हो?
सिपाहियों! इन दोनों से 100-100 उठक-बैठक लगवाए जाएं।”
सिपाही उन दोनों से 100-100 उठक-बैठक लगवाते हैं और बाहर फेंक देते हैं।
थोड़े दिनों में पूरे राज्य में खबर फैल जाती है कि शमशेर के खिलाफ शिकायत लेकर जाओ तो महाराज 100 उठक-बैठक लगवाते हैं।
दूसरी तरफ शमशेर डंडा लिए घूमता रहता है और उसका घर तुड़वाने में जो-जो लोग सिपाहियों के साथ आए थे,
उनके ऊपर मक्खी बैठी देखकर जोरदार डंडा लगाता है। लोग शमशेर को देखकर भागने लगते हैं।
गर्मी के मौसम में भी लोग चादर ओढ़कर घूमने लगते हैं। लेकिन शमशेर किसी को डंडे मारने और अपना बदला लेने से बाज नहीं आता। कुछ लोग इकट्ठा होकर महाराज के पास जाते हैं।
प्रजा, “महाराज! गुस्ताखी माफ हो, लेकिन आपके फरमान ने तो हम सबको मरवा दिया है। और अगर यही चलता रहा तो वह धीरे-धीरे पूरा राज्य खाली हो जाएगा।”
राजा, “शमशेर को हमारे सामने लाया जाए।”
दूसरी तरफ शमशेर को देखकर लोग भागने लगते हैं और अपने हाथ हिलाकर नाचने लगते हैं ताकि उनके ऊपर कोई मक्खी ना बैठे।
घर पर शमशेर की मां सर पर हाथ रखकर बैठी होती है।
शमशेर, “क्या हो गया मां? ऐसे क्यों बैठी हो?”
शमशेर की मां, “क्या करूं? एक तो राजा के सिपाहियों ने हमारा घर तोड़ दिया, दूसरा रोज तेरी शिकायतों से मैं परेशान हो गई हूं। एक काम कर… महाराज का फरमान उनको वापस कर दे।”
शमशेर, “क्यों कर दूं वापस? अभी तो मुझे अपना बदला लेना है।”
तभी राजा के सिपाही आते हैं और शमशेर सिपाहियों के साथ महल की तरफ चल देता है। शमशेर महल में आता है
और रानी की पीठ पर बैठी मक्खी देखकर अपने डंडे से एक डंडा महारानी को लगाता है।
महारानी, “महाराज! मैं तो मर गई!”
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राजा, “तुम्हारी इतनी गुस्ताखी? हमारी रानी पर हमला!”
शमशेर, “मैंने तो आपके फरमान का पालन किया है महाराज!”
राजा, “शमशेर! अब बहुत हो गया। हमारा शाही फरमान अब वापस कर दो।”
शमशेर, “नहीं महाराज! अभी कैसे? अभी तो मेरा घर गिराने वालों का हिसाब बाकी है। अभी तो मुझे उनसे मुआवजे की रकम भी लेनी है।”
राजा मन में कहते हैं, “अभी तो इसने महारानी को मारा है, क्या पता अगला डंडा मेरे ही ऊपर लगा दे!
एक काम करता हूं इसे मुआवजे की रकम मैं ही दे देता हूं ताकि इसका यह पागलपन उतर जाए।”
राजा, “शमशेर! हम यह सोच रहे हैं कि तुम्हारे घर का मुआवजा हम ही दे दें। आखिर हम यहां के राजा हैं। बताओ कितना मुआवजा चाहिए तुम्हे?”
शमशेर, “महाराज! मुझे पूरे 100 सोने के सिक्के चाहिए।”
राजा, “सेनापति जी! हमारे खजाने से पूरे 100 सोने के सिक्के शमशेर को दिए जाएं।”
सेनापति, “महाराज! 100 सोने के सिक्के कुछ ज्यादा नहीं हैं?”
राजा, “सेनापति जी! यह हमारा आदेश है। हमने जो आदेश दिया है उसका पालन कीजिए। और शमशेर! लाओ तुम हमारा शाही फरमान वापस कर दो हमें।”
शमशेर को अपने घर का मुआवजा मिल जाता है और साथ ही वह अपना बदला भी ले लेता है। राज्य के बाकी लोग अब सुकून से अपनी जिंदगी बिताते हैं।
दोस्तो ये Hindi Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!

