तीन मूर्ख ठग | Teen Murkh Thug | Funny Story | Comedy Kahani | Majedar Kahaniyan | Funny Cartoon In Hindi

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हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” तीन मर्ख ठग ” यह एक Funny Story है। अगर आपको Hindi Stories, Funny Story in Hindi या Majedar Kahaniya पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।


एक गांव में कालिया, गोपी और जग्गू नाम के तीन आवारा और बेवकूफ युवक रहते थे। उन तीनो की आपस में गहरी दोस्ती थी।

तीनों गांव में आवारा घूमते फिरते फिरते रहते थे। एक दिन वो तीनो गांव में बने हुए छोटे से खोके पर चाय पी रहे थे। तभी दुकानदार ने उनसे कहा।

दुकानदार, “ये आज तुम तीनों की आखरी चाय है। तुम तीनों ने छह महीने से अभी तक उधारी नहीं चुकाई।”

कालिया, “अरे! तो क्या हुआ हम कहीं भागे थोड़ी जा रहे है? दे देंगे तेरे पैसे, इतना बड़बड़ा क्यों रहा है बे?”

दुकानदार, “ये सुनते हुए मुझे पूरे तीन महीने हो गए।”

गोपी, “अबे तो तीन महीने और सुन ले। हम तीनो को जल्दी ही काम धंदा मिल जायेगा, समझा? पहली तनख्वाह से तेरे पैसे तेरे मुँह पर मार देंगे।”

गोपी की बात सुनकर दुकानदार का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

दुकानदार, “एक तो तुम तीनों ने छह महीने से उधार का पैसा नहीं दिया, ऊपर से मुझसे ज़बान भी लड़ा रहे हो। तुम तीनों को शर्म बची है की नहीं?”

जग्गू, “अबे काए की शरम..? जिसने करी शरम उसके फुटे करम। कितने पैसे हुए तेरे?”

दुकानदार, “आज के पैसे मिलाकर पूरे ₹4000?”

जग्गू, “धोंस तो ऐसे दिखा रहा है जैसे 4 लाख हो गए हों।”

दुकानदार, “पहले अपनी औकात से 400 की कर ही लो तुम तीनों। तुम तीनों एक नंबर के निठल्ले और आवारा हो। मुझे 3 दिन के अंदर अपनी सारी उधारी चाहिए।”

कालिया, “अबे पागल हो गया क्या? तीन दिन के अंदर हम तेरे पैसे कहाँ से लाके देंगे बे?”

दुकानदार, “कहीं से भी लाकर दो। तीन दिन के अंदर मेरे पैसे मेरे पास नहीं पहुंचे, तो मैं तुम्हारी शिकायत गाँव के मुखिया से करूँगा और तुम्हारे घर के अंदर जाकर तगादा करूँगा। तब कहीं जाकर तुम्हारी अक्ल ठिकाने आएगी।”

दुकानदार की बात पर कालिया आग बबूला होकर बोला, “क्या बोला तू? अबे, ज़रा से पैसों के लिए हमारे घर में घुसकर हमसे तगादा करेगा?

ऐसा करके तो देख, मार-मार के तेरे शरीर में भूसा भर दिया ना फिर कह दियो?”

तभी अचानक वहाँ पर गाँव का मुखिया आ गया। उन चारों को आपस में झगड़ते देख मुखिया कड़क कर आवाज में बोला, “क्या हुआ..? तुम चारों आपस में झगड़ा क्यों कर रहे हो बे?”

दुकानदार, “देखिये मुखिया जी, एक तो इन तीनों ने छह महीने से चाय का एक पैसा भी नहीं दिया, और जब मैंने इनसे पैसे मांगे तो उल्टा मुझसे बदतमीजी करने लगे।”

गोपी, “मुखिया जी, हमने इससे बोला था कि हम इसके पैसे जल्द से जल्द लौटा देंगे, मगर ये घर में घुसकर तगादा करने की धमकी दे रहा है।”

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मुखिया, “सही तो कह रहा है वो।”

जग्गू, “हमें थोड़ा सा वक्त चाहिए मुखिया जी। ये हमसे बोल रहा है कि तीन दिन के अंदर पैसे चाहिए। भला हम तीन दिन के अंदर पैसे कहां से लाकर देंगे?”

मुखिया, “इसकी चाय तो तुम खूब मज़े से और चटकारे ले ले कर पीते हो बे और पैसे देने के नाम पे बोल रहे हो कि कहाँ से लाकर देंगे?

तुम तीनों के अंदर शर्म नाम की कोई चीज़ है या नहीं? इतने हट्टे-कट्टे नौजवान होकर तुम चाय तक के पैसे नहीं दे पा रहे हो। शर्म आनी चाहिए तुम तीनों को।”

दुकानदार, “मुखिया जी, मुझे मेरे इनसे पैसे दिलवा दीजिये।”

मुखिया, “तुम तीनों ध्यान से सुनो, एक हफ्ते के अंदर-अंदर इसके पैसे लौटा देना वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। अब निकलो यहाँ से।”

वो तीनों वहाँ से चले जाते हैं और एक पेड़ के नीचे बैठकर सोचने लगते हैं।

गोपी, “अबे यार! बुरे फंस गए यार। अब ₹4000 एक हफ्ते में कैसे करेंगे यार?”

कालिया, “अबे चिंता मत कर, कहीं से इंतजाम कर लेंगे।”

जग्गू, “कहाँ से इंतजाम करेंगे? मेहनत-मजदूरी करना हम जानते नहीं। पैसे कहाँ से आएँगे? ऊपर से मुखिया भी हमको धमकी देकर चला गया।”

तभी वहाँ एक भिखारी आकर उनसे भीख मांगने लगता है।

भिखारी, “भगवान के नाम से कुछ दे दो, बेटा।”

कालिया, “अरे! जाओ बाबा, माफ़ करो।”

भिखारी, “भगवान के नाम पर कुछ दे दो, ₹1 ही दे दो।”

कालिया, “अरे! हमारे पास एक फूटी कौड़ी भी नहीं है। बोला ना, जाओ जाकर कहीं और से मांगो।”

उन तीनों की बात सुनकर भिखारी को गुस्सा आ जाता है।

भिखारी, “ऐसा लगता है जैसे तुम तीनों मुझसे भी ज्यादा गए-गुजरे हो। ये लो, मेरी तरफ से ₹5 तुम रख लो।”

भिखारी की बात सुनकर वो तीनों गुस्से से आग-बबूला हो जाते हैं।

गोपी, “अबे तेरा दिमाग तो ठीक है? क्या तू हमें अपनी तरह भिखारी समझ रहा है बे?”

भिखारी, “हाँ।”

गोपी, “क्या..?”

भिखारी, “क्योंकि तुम्हारी हालत तो मुझसे भी ज्यादा बदतर दिखाई दे रही है।”

जग्गू, “हम तीनों के पास कोई काम-धंधा नहीं है। समझा..?इसलिए हम यहाँ पर फालतू बैठे हैं।”

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भिखारी, “तुम्हारे मतलब का बस एक ही काम है, तुम भी भीख मांगना शुरू कर दो। लेकिन याद रखना, तुम्हें कोई भीख भी नहीं देगा, क्योंकि भीख भी देख कर दी जाती है।

और तुम तीनों तो हट्टे-कट्टे मुस्तंडे हुए हो। लानत है तुम पर।”

ये कहकर भिखारी वहाँ से चला गया।

गोपी, “अरे यार! अब तो भिखारी भी हम लोगों के मुँह पर भला-बुरा बोल कर जाने लग गए हैं। और ऊपर से हमें भीख मांगने की सलाह देकर गया है।”

जग्गू उन दोनों की बात सुनकर कुछ सोचकर बोला।

जग्गू, “वैसा कुछ गलत बोलकर नहीं गया। काम बुरा नहीं है।'”

कालिया, “अबे! तू पागल हो गया क्या? तू ये कहना चाहता है कि हम सभी भीख मांगे? गाँव में हमारी रही-सही नाक भी कट जाएगी।”

गोपी, “तो मैं कब कह रहा हूँ कि गाँव में भीख मांगेंगे? दूसरे गाँव में जाकर मांगेंगे। मैंने सुना है कि ये भिखारी एक दिन में बहुत कमा लेते हैं।”

कालिया, “नहीं नहीं, ये काम नहीं करना।”

जग्गू, “मेरी बात तो सुन, सिर्फ एक हफ्ते की बात है। एक हफ्ते में इतने तो हम लोग भी पैसे भीख मांगकर जमा कर ही लेंगे कि उस चाय के दुकानदार की उधारी चुका दें।

और उसे बोल देंगे कि तीनों बाहर बहुत मेहनत-मजदूरी करके ये पैसे जमा करके लेकर आए हैं, जिससे हमारा गाँव में भी नाम हो जाएगा और कोई हमें निठल्ला और निकम्मा भी नहीं कहेगा।”

जग्गू की बात सुनकर गोपी और कालिया की आँखों में चमक आ गई।

गोपी, “लेकिन यार, हम तीनों को भीख देगा कौन? जब हमसे कोई भीख मांगने आता है तो हम उससे खुद बोल देते हैं कि कोई काम-धंधा नहीं कर सकता क्या?”

जग्गू, “इसका भी उपाय है मेरे पास। एक उपाय है, हम तीनों को बस थोड़ी सी एक्टिंग करनी पड़ेगी।

हम तीनों में से एक अंधा, एक बहरा, एक गूंगा बन जाएगा। उसके बाद हम तीनों का काम आसान हो जाएगा। लोग हम पर तरस खाकर आसानी से भीख दे देंगे, समझे?”

वो तीनों दूसरे गाँव पहुँच गए। कालिया गूंगा, गोपी अंधा, और जग्गू बहरा बन जाता है। उस गाँव में एक व्यक्ति एक दुकान पर खड़ा होकर समोसे खा रहा होता है।

जग्गू, “हम तीनों एक साथ जाएंगे तो हो सकता है कि हम पर शक हो जाए। सबसे पहले मैं जाता हूँ।”

कालिया उस व्यक्ति के पास जाकर गूंगे की एक्टिंग करके भीख मांगने लगा, मगर वह यह भूल गया कि उसे गूंगा बनकर भीख मांगनी थी।

कालिया, “भगवान के नाम पर कुछ दे दो, बाबा। मैं जन्मजात गूंगा हूँ।”

कालिया की बात सुनकर वह व्यक्ति बुरी तरह से चौंक गया।

व्यक्ति, “अरे! तू जन्मजात गूंगा है तो फिर बोल कैसे रहा है?”

कालिया को अचानक ध्यान आया कि उसे तो गूंगे की एक्टिंग करनी थी, और फिर वह अचानक से गूंगे की एक्टिंग करने लगा।

व्यक्ति, “मारो भाई सब इसको, मारो।”

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इतना कहकर वह व्यक्ति कालिया को बुरी तरह से पीटने लगा और आसपास के लोगों ने भी कालिया पर हाथ साफ किए। कालिया दर्द से कराहता हुआ अपने दोस्तों के पास चला गया।

कालिया, “अबे! उन लोगों ने मुझे बहुत मारा वे। पीट पीटकर मेरा बुरा हाल कर दिया।”

गोपी, “अबे बेवकूफ! तुझे गूंगा बनना था! तूने कभी सुना है कि कोई गूंगा बोल रहा है कि मैं जन्मजात गूंगा हूँ?

तू तो कच्चा ऐक्टर है, अब देख मैं जाता हूँ। देख मैं कैसे पैसे ऐंठ कर लाता हूँ।”

इतना कहकर गोपी उसी व्यक्ति के पास चला गया।

गोपी, “भगवान के नाम पर कुछ दे दो, बाबा इस अंधे को। मेरे घर में मेरी बीवी और बच्चे दो दिन से भूखे हैं।”

उस व्यक्ति को गोपी को देखकर बड़ा तरस आया। वह अपनी जेब से 100 का नोट निकालकर गोपी को देखकर बोला।

व्यक्ति, “कहाँ रहते हो तुम? पहले तो तुम्हें इस गाँव में कभी नहीं देखा।”

गोपी, “मैं यहीं पास के गाँव में ही रहता हूँ, बाबूजी।”

व्यक्ति, “क्या तुम पैदाइशी अंधे हो?”

गोपी, “नहीं बाबूजी, कुछ वक्त पहले मजदूरी करते समय दीवार मेरे ऊपर गिर गई। मेरे पास इलाज कराने के लिए पैसे नहीं थे, और मेरी आँखें चली गईं।”

व्यक्ति, “तुम घबराओ मत, अगर तुम्हें और भी पैसों की जरूरत हो, तो तुम मुझसे मिल लेना।”

गोपी, “लेकिन मैं आपसे कैसे मिल सकता हूँ, बाबूजी, मैं तो देख ही नहीं सकता।”

व्यक्ति, “मेरा नाम रामू है, मैं यहाँ का मुखिया हूँ। तुम किसी से भी बोल देना कि मुझे गाँव के मुखिया से मिलना है, वो तुम्हें आसानी से मेरे पास पहुँचा देगा।”

अचानक गोपी ने देखा कि उस दुकान पर एक बड़ा सा साँप बैठा हुआ था, जो धीरे-धीरे करके गोपी और मुखिया की ओर बढ़ रहा था।

गोपी, “साँप सांप… अरे! भागो सब यहाँ से, यहाँ पर एक बड़ा सा साँप है।”

गोपी की बात सुनकर दुकान में हड़बड़ी मच गई, लोगों ने तुरंत साँप को पकड़कर मार दिया।

मुखिया, “तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया भाई! अगर तुम मुझे नहीं बताते, तो मेरा यही काम तमाम हो जाता।

लेकिन तुम तो अंधे हो ना? फिर तुमने साँप को कैसे देख लिया?”

गोपी, “वो… वो… मुझे साँप की आहट सुनाई दी। मुझे पता लग जाती है जब साँप आता है।”

मुखिया गुस्से से आग बबूला हो उठा, “झूठ बोलता है साले, अंधा बनकर भीख मांगता है। तुझे शर्म नहीं आती? एक तो वैसे ही अभी पिटकर गया था, अब तेरी बारी है। मारो इसको।”

इतना कहकर सभी लोग गोपी को मारने के लिए बुरी तरह से जुट गए। गोपी वहाँ से भागता हुआ अपने दोस्तों के पास पहुँचा।

जग्गू, “तू तो बड़ी-बड़ी डींगे मारकर गया था, आ गया मार खाकर।”

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गोपी, “अरे यार! एक्टिंग तो मैंने सही की थी, लेकिन बोलना मेरी मजबूरी थी, अगर नहीं बताता तो वो साँप मुझे भी डस सकता था।”

जग्गू, “अरे! तुम दोनों किसी काम के नहीं हो। तुम दोनों कुत्ते की तरह मार खाकर आ गए। तुमसे तो ठीक से एक्टिंग भी नहीं होती।”

गोपी, “हाँ, तू तो बहुत अच्छा अभिनेता है, सलमान खान के बाद तो तेरी एक्टिंग का ही नंबर आता है।”

जग्गू, “अब देखो, मैं कैसे उस गाँव के मुखिया को बेवकूफ बनाता हूँ?”

जग्गू बहरा बनकर उसी मुखिया के पास गया।

जग्गू, “ईश्वर के नाम पर कुछ दे दो, बाबा।”

मुखिया, “अभी दो लोग यहाँ से पिटकर गए, पता नहीं क्यों मुझे तुझ पर भी शक हो रहा है कि तू भी उन्हीं का साथी है।”

लेकिन जग्गू उसकी बात पर कुछ नहीं बोला।

मुखिया, “अबे बहरा है क्या?”

जग्गू खामोश रहा।

मुखिया, “भगवान के नाम पर इस बहरे को कुछ दे दो, बाबा।”

मुखिया, “समझ गया, जब तू मेरी बात को नहीं सुन ही नहीं रहा था मतलब कि तू वास्तव में बहरा है।”

मुखिया ने वही 100 का नोट निकालकर जग्गू को देने लगा कि अचानक दूसरा भिखारी मुखिया के सामने आकर खड़ा हो गया।

भिखारी, “भगवान के नाम पर कुछ दे दो, बाबा।”

मुखिया उस भिखारी को भी कुछ पैसे देने लगा, तभी उस भिखारी की नजर जग्गू पर पड़ी। वह वही भिखारी था जो कुछ देर पहले उन तीनों दोस्तों से मिला था।

मुखिया ने उस भिखारी को देखकर कहा।

मुखिया, “तू तो यहाँ पर बरसों से भीख मांग रहा है। ले, तेरा एक और साथी आ गया।”

मुखिया की बात सुनकर भिखारी चौंक गया।

भिखारी, “कौन सा साथी? मैं तो अकेला हूँ।”

मुखिया, “अरे! यह देख, यह दूसरा भिखारी है। बेचारा बहरा है, सुन नहीं सकता।”

मुखिया जी की बात सुनकर भिखारी बोला, “पागल हो गए हो क्या मुखिया जी? यह कोई बहरा-वहरा नहीं है।

यह दूसरे गाँव का रहने वाला है। इसके साथ इसके दूसरे निकम्मे साथी भी होंगे।”

मुखिया गुस्से से आग बबूला हो गया।

मुखिया, “इसका मतलब तू भी धोखेबाज है?”

मुखिया ने जग्गू के कान पर एक चाँटा जड़ दिया। भिखारी की बात सुनकर जग्गू का गुस्सा भी आसमान पर पहुंच गया। गुस्से में वह ये भी भूल गया कि उसे यहां बहरे की एक्टिंग करनी थी।

जग्गू, “झूठ बोल रहा है ये भिखारी। आप किसी से भी पूछ लो कि मैं जन्मजात बहरा हूं।”

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मुखिया, “अगर तू जन्मजात बहरा है, तो फिर तूने इस भिखारी की बात कैसे सुन लीं बे?”

मुखिया की बात सुनकर जग्गू वहाँ से भागने लगा। मुखिया ने चिल्लाकर सभी से कहा,

मुखिया, “पकड़ो इस नाटकबाज को, ज़रूर यह अपने उन दो साथियों के पास भाग रहा होगा।”

जग्गू भागते हुए अपने दोस्तों के पास पहुँचा, लेकिन उसके पीछे-पीछे सभी गाँव वाले पहुँच गए।

मुखिया, “यही हैं वो तीनों नौटंकीबाज, जो भीख माँगने की एक्टिंग कर रहे हैं। इन लोगों की वजह से ही बेचारे जो असली भिखारी होते हैं, उन्हें भी भीख नहीं मिल पाती। मारो इन सबको, मारो मारो।”

सभी गाँव वालों ने उन तीनों को पीट-पीटकर उनका बुरा हाल कर दिया। तीनों फटे हुए कपड़े लेकर अपने गाँव वापस आ गए।

कालिया, “भाई, कल से मजदूरी पर चलेंगे हम तीनों। आज नहीं तो एक हफ्ते बाद हम अपने गाँव में मुखिया के हाथों भी पिटेंगे।”

गोपी, “भाई, तू सही कहता है यार।”

जग्गू, “तुम दोनों की बात सही है, हम तीनों को अब कोई काम-धंधा ढूँढ लेना चाहिए।”

इसके बाद वे तीनों सुधर गए और मेहनत से काम-काज करने लगे।


ये Funny Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!


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