चोर फकीर | CHOR FAKEER | Moral Kahani | Achhi Achhi Kahaniyan |Hindi Kahani | Moral Stories

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हेलो दोस्तो ! कहानी की इस नई Series में आप सभी का स्वागत है। आज की इस कहानी का नाम है – ” चोर फकीर ” यह एक Moral Story है। अगर आपको Moral Stories, Hindi Stories या Hindi Moral Kahaniyan पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।


किसी शहर में चोरों का आतंक बहुत बढ़ गया था। इसलिए पुलिस ने पूरे शहर के अन्दर नाका बंदी लगा दी और शहर के सारे चोरों को पकड़ने के लिए उन्होंने एक तरकीब बनाई।

लेकिन शहर में एक गैंग ऐसी थी जिनका मालिक चंगेजखान नाम का एक बदमाश था।

चंगेज खान बहुत ही शातिर बदमाश था, वो कैसे भी करके अपने दो चेलों के साथ पुलिस की नजरों से बचकर छुप जाता और उस शहर से भागने की तरकीब सोचता है।

चंगेज खान, “ऐसा मैं क्या करूँ जिससे हम सलामत रहे?”

चंगेज खान बहुत देर तक सोचता है की तभी उसे सामने लगे पेड़ के निचे एक छोटी सी मजार दिखाई देती है।

चंगेज खान, “हम्म.. अब मैं समझ गया कि मुझे क्या करना है? सलीम और आसिफ, चलो मेरे साथ। मुझे एक तरकीब सूझी है।”

सलीम, “मालिक, आप हमें कहाँ लेकर जा रहे हैं? देखिये पुलिस हम लोगों को कैसे ढूंढ रही है? कितनी मुश्किल से हमें यह जगह मिली है?”

चंगेज खान, “अरे जाहिल इंसान! मैं तुम्हारा मालिक हूँ। मुझे मत बताओ कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं?”

आसिफ, “मालिक, आप हमें कहाँ लेकर जा रहे हैं? और अब तो हम ये चोरी डकैती भी नहीं कर सकते।”

चंगेज खान, “अरे मूर्ख!  हमें ये चोरी डकैती अब नहीं करनी पड़ेगी बल्कि लोग खुद से हमें अपना धन दे कर जायेंगे।”

सलीम, “आखिर आपके दिमाग में ऐसी कौन सी तरकीब चल रही है जिससे लोग खुद से हमें अपना धन दे कर जायेंगे?”

चंगेज खान, “अरे मूर्खो! तुम दोनो इधर आओ और देखो, जो मैं देख रहा हूँ। इससे हमारी सारी मुसीबतें खत्म हो जायेंगी।”

सलीम और आसिफ चंगेज खान के पास जाते हैं।

सलीम, “वो देखो मालिक मुझे तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। अरे आसिफ! तुझे दिखाई दे रहा है क्या? ये मालिक क्या बोल रहे हैं?”

आसिफ, “हाँ मालिक, मुझे भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। मुझे तो बस चाट की दुकान दिखाई दे रही है। हाय! चाट देख कर तो मुह में पानी आ गया है।”

सलीम, “अरे हाँ यार, मुझे भी बस वो चाट की दुकान दिखाई दे रही है।”

चंगेज खान, “अरे उल्लू के पट्ठों! तुमको वो पेड़ के नीचे बनी मजार दिखाई नहीं दे रही, आँखें खोल कर देखो। तुम दोनो को तो बस खाने की चीजें दिखाई देती है।”

सलीम, “लेकिन मालिक उस मजार का हम करेंगे क्या? मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है।”

चंगेज खान, “अरे मूर्खो! हो कभी तो अपने दिमाग का ढक्कन खोल लिया करो या सब कुछ मैं ही तुम्हें बताऊं? चलो मेरे साथ, दोनो को सही से बताता हूँ।

फकीरों वाले कपड़े पहन कर वो तीनों शहर से बाहर एक गाँव की तरफ जाते हैं।

सलीम, “मालिक हम इतनी देर से चल रहे हैं, हम ये ऐसे कपड़े पहन कर कहाँ जा रहे हैं?”

आसिफ, “हाँ मालिक, हम आखिर कहाँ जा रहे है? मैं तो बहुत थक गया हूँ, मुझसे बिल्कुल भी नहीं चला जा रहा है।”

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चंगेज खान, “ठीक है, हम थोड़ी देर यहीं पेड़ के नीचे बैठ जाते हैं।”

वो तीनों के तीनों पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर रहे होते हैं की तभी चंगेज खान की नजर थोड़ी दूरी पर रखे एक बड़े से पत्थर पर जाती है।

चंगेज खान, “अरे अरे! ये ये इतना बड़ा पत्थर..? आखिर इसी की तलाश में तो हम घूम रहे थे, आखिर ये मुझे मिल ही गया। सलीम…आसिफ, देखो, इधर आओ।”

सलीम, “क्या हुआ मालिक?”

चंगेज खान, “अरे! ये देखो कितना बड़ा पत्थर है? जिसको मैं इतनी देर से ढूंढ रहा था वो आखिर मुझे मिल ही गया।”

आसिफ, “मालिक इतने बड़े पत्थर का हम आखिर करेंगे क्या?”

सलीम, “हाँ मालिक, आसिफ सही कह रहा है। आखिर हम इतने बड़े पत्थर का करेंगे क्या?”

चंगेज खान, “अरे मूर्खो! ये जो इतना बड़ा पत्थर है उसी को हम मजार बनायेंगे।”

फिर तीनों जाकर उस पत्थर के ऊपर एक हरा कपड़ा रख देते हैं और वहाँ पर अगरबत्ती जलाकर उस पत्थर को मजार बना देते हैं।

आसिफ, “मालिक, हम इस पत्थर को दरगाह तो बना रहे हैं लेकिन इससे लोग हमें अपना धन कैसे देकर जायेंगे।

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर आप करना क्या चाहते हैं?”

चंगेज खान, “अरे मूर्खो! तुम्हें नहीं पता की लोगो के अन्दर कितना अंधविश्वास है?

कि वो लोग इस पत्थर को भी मजार समझ लेंगे और जिसका फायदा हम लोग उठायेंगे।”

आसिफ, “अच्छा मालिक, अब मैं समझ गया की आपके दिमाग में चल क्या रहा है?”

चंगेज खान, “सलीम, सुनो तुम गाँव में जाकर गाँव के लोगों का दिल जीतो और उस गाँव में और गाँव के लोगों के घरों में क्या परेशानी है? उसका पता लगाओ।”

सलीम, “लेकिन मालिक मैं आखिर गाँव के लोगों की परेशानी पता कैसे लगाऊँगा?”

चंगेज खान, “तुम वहाँ पर जाकर एक चाय की दुकान खोलो और जो भी लोग चाय पीने आयेंगे, तुम उनकी बातों पर नज़र रखो।

लेकिन तुम्हें गाँव के सभी लोगों पर ऐसी नजर रखनी होगी जिससे की तुम्हे सबकी परेशानियों का पता लग सके

और फिर तुम वो सब मुझे आकर बता सको। तभी सभी लोगों को मुझ पर विश्वास होगा।”

सलीम, “ठीक है मालिक, मैं अभी गाँव में चला जाता हूँ और अपना काम शुरू कर देता हूँ।”

चंगेज खान, “और हाँ, इस बात का भी ध्यान रखना की किसी को तुम पर शक न हो। नहीं तो हमारा भांडा फूट जाएगा।”

चंगेज खान और आसिफ वही उनकी बनाई हुई धोखे बाज मजार पर बैठ जाते हैं और सलीम गाँव में चला जाता है।

सलीम जब गाँव में जाता है, तभी गाँव का एक आदमी उसे देखकर बोलता है।

कुशल, “अरे! ये कौन है जो सीधा हमारे गाँव में घुस आ रहा है? इसे तो मैंने पहले कभी नहीं देखा, इसका तो पता लगाना पड़ेगा।”

कुशल, “अरे भाई! तुम इस गाँव के नहीं दिखते हो। किसके घर आये हो, कौन रहता है तुम्हारा इस गाँव में?”

सलीम, “नहीं नहीं जनाब, मैं इस गाँव में नया आया हूँ। मैं गाँव में किसी को जानता नहीं।

मैं तो बस गाँव के बाहर से गुज़र रहा था की वही गाँव के रास्ते पर मुझे मजार दिखाई दी।”

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कुशल, “अरे! मजार वो भी इस गाँव के रास्ते पर। अरे भाई! तुम्हें कोई गलती हुई होगी

क्यूँकि इस गाँव के रास्ते पर, तो क्या इस पूरे गाँव में भी कोई भी मजार नहीं है?”

सलीम, “नहीं नहीं जनाब, मैंने खुद अपनी आँखों से वो मजार देखी है और वहाँ के फकीर बाबा ने मुझे बताया

की इस गाँव में जाकर अगर मैं अपनी चाय का धंधा खोलूंगा तो मेरी सारी परेशानी खत्म हो जाएगी। उन्हें मेरी हर एक छोटी से छोटी बात पता है।”

कुशल, “फकीर बाबा वो भी इस गाँव के बाहर..? मैंने आजतक नहीं देखा की वहाँ पर कोई मजार भी बनी हुई है।”

सलीम, “हाँ जनाब, मैं तो इस गाँव में नया आया हूँ। इसलिए मुझे नहीं पता इस गाँव के रास्ते पर एक मजार है, वहाँ जो फकीर बाबा है बहुत ही अंतर्यामी है

और मुझे उन पर बहुत विश्वास हो गया है। इसलिए मैं चाहता हूँ की मैं इस गाँव में चाय की दुकान खोल कर अपना काम धंधा शुरू करूँ।”

कुशल, “मैं तो यहाँ पर कब से रह रहा हूँ, मुझे तो आज तक कोई मजार और वो फकीर बाबा कहीं नज़र नहीं आये।

आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? अभी जाकर सरपंच जी से बात करता हूँ कि वो फकीर बाबा आया कहाँ से?

ठीक है भाई, मैं तुमको सरपंच जी के पास लेकर चलता हूँ, उनसे पूछ कर, तुम यहाँ गाँव में अपनी चाय की दुकान खोल लेना।”

कुशल सलीम को लेकर सरपंच के पास जाता है और सरपंच को सारी बात बता देता है।

सरपंच, “अच्छा अच्छा अच्छा… तुम यहाँ पर अपनी चाय की दुकान खोलना चाहते हो?

ठीक है, तुम यहाँ अपना काम धंधा खोल सकते हो। लेकिन एक बात का ध्यान रखना की इस गाँव के लोगो के साथ कोई बेईमानी मत करना।”

सलीम, “नहीं नहीं जनाब, मैं मैं यहाँ गाँव में किसी के साथ कोई भी बेईमानी नहीं करूंगा।

मैं तो बस यहाँ पर एक चाय की दुकान खोल कर अपना काम धंधा शुरू करना चाहता हूँ, बस।”

सरपंच, “ठीक है तुम कल से ही अपना काम शुरू कर लेना।”

सलीम, “ठीक है जनाब, मैं कल ही चाय की दुकान खोल लूंगा।”

सलीम वहाँ से चला जाता है। उसके जाने के बाद कुशल सरपंच को उस फकीर बाबा के बारे में बताता है।

कुशल, “ये कौन फकीर बाबा है जिनको आज तक हम लोगों ने नहीं देखा? और वो भी गाँव के रास्ते में, वहाँ तो आज तक कभी कोई मजार नहीं थी।”

सरपंच और कुशल के मन में फकीर बाबा की बात खटकती रही। अगले दिन सलीम गाँव में चाय की दुकान खोल लेता है।

ग्राहक, “अरे भाई! तुम गाँव में नए लगते हो।”

सलीम, “जी जनाब, मैं इस गाँव में नया हूँ।”

ग्राहक, “अच्छा… जरा 1 कप चाय तो पिलाना।”

सलीम, “जी जनाब, अभी देता हूँ।”

सलीम की चाय की चर्चा पूरे गांव में होने लगी। गांव के सभी लोग उसकी दुकान पर चाय पीने आने लगे।

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धीरे धीरे करके उसकी चाय की दुकान पर लोगों की बहुत भीड़ होने लगी।

चमन, “अरे सुमन! यह लड़का जैसी चाय बनाता है, ऐसी चाय मैंने आज तक नहीं पी। इसके चाय का स्वाद तो बिल्कुल ही अलग है।”

सुमन, “जी, आप सही कह रहे हैं। मैंने भी आज तक ऐसी चाय कभी नहीं पी। इसका स्वाद तो बिल्कुल अलग है।”

चाय की दुकान पर ऐसे ही लोगों की भीड़ बढ़ने लग जाती है और लोग वहाँ बैठ कर अपने घर की परेशानियों की बातें भी करते हैं।

जगन, “अरे चमन भाई! मैं तो बहुत परेशान हो गया हूँ। तेरी भाभी को तो पता नहीं कौन सी बीमारी लग गई है कि वो ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही है?”

चमन, “अरे! हाँ जगन भाई, वैसे कुछ पता चला की भाभी को क्या हुआ है?”

जगन, “नहीं यार, कुछ पता नहीं चल रहा है। मैंने गाँव के सारे डॉक्टरों को दिखा लिया है

लेकिन उसकी बीमारी का कोई इलाज ही नहीं मिल रहा। मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा की आखिर मैं क्या करूँ?”

चमन, “मैं तो कहता हूँ की तुम एकबार किसी बाबा या फकीर को दिखा लो, क्या पता उन्हें कुछ और ही दिक्कत हो?”

जगन, “अरे चमन भाई! यहाँ आस पास के गाँव में साधू बाबा या फकीर नहीं है जिससे की मैं उसकी बीमारी का इलाज करवा सकूँ।”

उन दोनों की सारी बातें सलीम सुन रहा होता है और आकर जगन से बोलता है।

सलीम, “अरे जनाब! आप मुझे बहुत परेशान दिखाई दे रहे हैं, क्या हुआ है?

मैं भी आपकी बातें सुन रहा था की आपकी बीवी को कोई बीमारी है और किसी साधु या फकीर के बारे में आप बात कर रहे थे।”

जगन, “हाँ भाई, मेरी बीवी इतने सालों से बीमार है। पता नहीं उसे कौन सी बीमारी लगी है? इतने डॉक्टरों को दिखा चुका हूँ लेकिन कुछ फर्क दिखाई ही नहीं दे रहा है।

मैंने सुना था की तुमने ये दुकान किसी फकीर बाबा के कहने से खोली है। कौन है वो फकीर बाबा और कहाँ रहते हैं? क्या तुम हमें उनका पता बता सकते हो?”

सलीम, “चलो आज इतने दिनों बाद कोई मुर्गा फंसा आखिर। अभी जाकर ये सारी बातें मैं मालिक को बता देता हूँ जिससे की वो सतर्क रहे।”

जगन, “अरे अरे भाई! तुम कौन से ख्यालों में खो गए?”

सलीम, “अरे नहीं साहब, मैं बस ऐसे ही…”

जगन, “चाहे कितना भी पैसा लग जाए लेकिन मैं चाहता हूँ की मेरी मीना जल्दी से ठीक हो जाए जिससे की मैं उसके साथ पहले की तरह खुश रहूँ।”

सलीम, “अरे जनाब! वो बाबा बहुत अच्छे है, वो आपकी मदद जरूर करेंगे। उनकी मजार बस गाँव के रास्ते पर ही है।”

सलीम भागता हुआ चंगेज खान के पास जाता है।

सलीम, “अरे मालिक! कहाँ है आप, बाहर आइये? आज मुर्गा फंसा है, बस थोड़ी देर में वो आता ही होगा।”

चंगेज खान, “अच्छा अच्छा.. कौन है? तूने उसकी पूरी खैर खबर ली ना?”

सलीम, “हाँ मालिक, मुझे उसकी सारी परेशानी पता है।”

सलीम चंगेज खान को जगन के बारे में सब बता देता है। थोड़ी देर बाद जगन चमन के साथ मजार पर आता है।

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आसिफ, “मालिक, ये वही है जिसके बारे में आपको बताया था।”

जगन और चमन को आता देख सलीम मजार के पीछे जाकर छुप जाता है।

जगन, “फकीर बाबा कृपा करके मेरी मदद कीजिये।”

चंगेज खान, “अरे बेटा! तू परेशान मत हो। मैं तेरी सारी परेशानी खत्म कर दूंगा।”

चमन, “बाबा आपको नहीं पता की ये बहुत परेशान है।”

चंगेज खान, “बेटा, मुझसे कुछ नहीं छिपा। मुझे सब पता है। तू परेशान मत हो, तेरी बीवी जल्दी ठीक हो जाएगी।”

चंगेज खान की बात सुनकर जगन और चमन हैरान हो जाते हैं कि जगन की बीवी के बारे में फकीर बाबा को कैसे पता?

जगन, “बाबा, आपको मेरी परेशानी के बारे में कैसे पता? मैंने तो आपको अपने बारे में कुछ भी नहीं बताया, फिर आपको कैसे पता कि मेरी बीवी की तबियत खराब है।”

चंगेज खान, “बेटा, मुझे सब पता है मुझे सब की खबर रहती है। तुम परेशान मत हो तुम्हारी बीवी जल्दी ठीक हो जाएगी।”

चंगेज खान ने अपना झोला खोला और उसमे से एक पुड़िया निकाली।

चंगेज खान, “ये लो बेटा, ये भभूत है। इसे तुम दोनों रात के खाने में मिला लेना और खाकर सो जाना, जल्द ही तुम्हारी सारी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।”

जगन, “पर बाबा, मुझे तो कुछ नहीं हुआ। तो मैं ये भभूत क्यों खाऊं? ये तो मेरी बीवी के लिए है न?”

चंगेज खान, “बेटा, तेरी बीवी को कोई बीमारी नहीं है। बस तुम्हारे घर में कुछ बुरी नजर है

जिस वजह से तुम्हारा सारा पैसा ऐसे ही खराब हो रहा है और तुम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।”

जगन, “अच्छा…? हां तभी मैं सोचूं बाबा की आखिर मेरी बीवी को ऐसी कौन सी बीमारी लगी है

जो अभी तक ठीक होने का नाम नहीं ले रही थी। ठीक है बाबा, मैं रात के खाने में मिला लूंगा।”

चमन और जगन वहाँ से चले जाते हैं। तभी सलीम मजार के पीछे से निकल कर बाहर आता है।

सलीम, “अब आएगा मजा। देखना रात को क्या होता है?”

सलीम वापस गाँव में चला जाता है और जगन के घर पर नजर रखता है। जैसे ही जगन और उसकी बीवी भभूत को खाकर सोते है की तभी वो दोनों बेहोश हो जाते हैं।

जगन और उसकी बीवी के बेहोश होने का फायदा उठाकर चंगेज खान, सलीम और आसिफ तीनों जगन के घर में घुस जाते है।

चंगेज खान, “हो गया न काम इन दोनों का? चल अब जल्दी जल्दी हम भी अपना काम कर लेते हैं।”

आसिफ, “मालिक, ये दोनो सच में सो गए होंगे न?”

चंगेज खान, “अरे! सोए नहीं बेहोश हो गए। हमें चोरी करने से कोई भी नहीं रोक सकता है।”

फिर जल्दी जल्दी चंगेज खान और सलीम जल्दी से जगन के घर से सारा पैसा और ज्वैलरी निकाल कर चोरी करके वहाँ से चले जाते हैं।

चंगेज खान, “आज तो मजा आ गया। आज बहुत दिनों बाद इतना सारा पैसा और सोना देखकर मन को बहुत शांति मिली है।”

अगले दिन जब जगन उठता है तो उसके घर में सब कुछ बिखरा होता है, उसकी अलमारी के गेट खुले होते हैं।

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जगन, “हाय हाय! ये क्या हो गया? मेरी तो किस्मत ही फूट गई। अब मैं क्या करूँगा?”

जगन और उसकी बीवी दोनो जोर जोर से रोते है की उनके रोने की आवाज सुनकर गाँव के सभी लोग आ जाते हैं।

कुशल, “अरे अरे! क्या हुआ भाई? तुम रो क्यों रहे हो?”

जगन, “अरे कुशल भाई! मेरी तो किस्मत ही फूट गई। रात को मेरे घर में चोरी हो गई और चोरों ने कुछ नहीं छोड़ा। अब मैं क्या करूँगा?”

कुशल, “क्या…चोरी? आज तक इस गाँव में कभी किसी के यहाँ चोरी नहीं हुई। लेकिन आज पहली बार चोरी हुई है, ऐसा कैसे हो सकता है?”

तभी वहाँ सरपंच भी आ जाता है।

सरपंच, “अरे जगन! क्या हुआ? तू ऐसे रो क्यों रहा है?”

कुशल, “सरपंच जी, जगन के घर में रात को चोरी हो गई है और चोरों ने कुछ भी नहीं छोड़ा।”

सरपंच, “चोरी..? ऐसा कैसे हो सकता है? हमारे गाँव में तो आज तक कभी किसी के यहाँ एक सुई तक चोरी नहीं हुई।

और जगन तुम्हारी चोरी कैसे हो गयी, ये कुछ समझ में नहीं आ रहा।”

सरपंच और कुशल जगन के घर से बाहर आ जाते हैं।

सरपंच, “कुशल, तुम पता लगाओ की आखिर कौन है जो इस गाँव में चोरी कर रहा है?”

कुशल, “ठीक है सरपंच जी, आप चिंता मत करें। मैं जल्द ही उस चोर का पता लगाता हूँ।”

कुशल उस चोर का पता लगाने में लग जाता है। लेकिन गाँव में रोज किसी न किसी के घर में चोरी होती रहती है।

सरपंच और गाँव वाले बहुत परेशान रहते है कि आखिर ऐसा कौन सा चोर है जो हर रोज किसी न किसी के यहाँ चोरी कर रहा है?

सरपंच, “कुशल, तुमने पता लगाया? मैंने तुमसे उस चोर के बारे में पता लगाने के लिए कहा था।”

कुशल, “सरपंच जी, उस चोर का तो पता नहीं लगा लेकिन जो कोई भी उस फकीर बाबा के यहाँ जाता है तो रात को ही उसके घर में चोरी हो जाती है।

मुझे ये बात कुछ अटपटी लग रही है। मुझे लगता है की हमें उस फकीर बाबा और सलीम पर निगरानी रखनी होगी।”

सरपंच, “ठीक है कुशल, तुम्हे जैसा ठीक लगता है तुम वैसे करो। लेकिन जल्दी से उस चोर का पता लगाओ।”

एकदिन कुशल सलीम का पीछा करते हुए मजार पर पहुँच जाता है। वो देखता है कि सलीम और वो फकीर बाबा मजार पर बैठकर शराब पी रहे होते हैं और आपस में बातें कर रहे होते हैं।

सलीम, “मालिक, आपकी तरकीब बहुत काम आई और किसी को पता भी नहीं चला की ये उनके साथ कौन कर रहा है? आपकी नशीली पुड़िया तो काम आ गयी।”

आसिफ, “हाँ मालिक, मुझे तो लगता है की अब हमें यहाँ से चले जाना चाहिए। हमने यहाँ पर रह कर बहुत सारा पैसा इकट्ठा कर लिया है।

क्यूँकि अगर किसी को पता चला तो हमारे लिए बहुत परेशानी खड़ी हो जाएगी।”

चंगेज खान, “अरे! तू चिंता मत कर। मुझे बस एक मोटा हाथ मारना है जिससे की हमारी जिंदगी आराम से गुजर जाए। हमें और कोई काम धंधा भी नहीं करना पड़ेगा।”

उन सब की सारी बातें कुशल सुन रहा होता है।

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कुशल, “अच्छा तो ये माजरा है। यह कोई फकीर बाबा नहीं, यह तो एक चोर है,

मुझे कुछ न कुछ करके इन सब का पर्दा फाश करना होगा। मैं अभी जाकर सरपंच जी से बात करता हूँ।”

कुशल भागता हुआ सरपंच के घर जाता है।

कुशल, “सरपंच जी… सरपंच जी, मैंने उसका पता लगा लिया है। वो चोर कोई और नहीं बल्कि फकीर बाबा और सलीम है।

ये एक गुंडा है। इसे पकड़ने के लिए हमें कोई तरकीब लगानी होगी।”

सरपंच, “कुशल तुम सही कह रहे हो। मेरे पास एक तरकीब है।”

सरपंच कुशल को तरकीब बताता है।

कुशल, “ठीक है, अब हम ऐसे ही करेंगे।”

अगले दिन सरपंच और कुशल मजार पर जाते हैं। सरपंच को आता देख चंगेज खान डर जाता है।

चंगेज खान, “यह यहाँ कैसे..? और मुझे तो इसके बारे में कुछ भी नहीं पता, मैं इसकी परेशानी के बारे में क्या बताऊंगा?

ये सलीम कहाँ मर गया? आजकल इसका काम में बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहता है।”

सरपंच, “बाबा, आप तो सब जानते है, मैं बहुत परेशान हूँ। अब मैं आपको क्या बताऊँ?”

चंगेज खान, “बेटा, तू परेशान मत हो। मुझे तेरी सारी परेशानी पता है। तू चिंता मत कर, मैं हूँ न।”

चंगेज खान अपने झोले में से एक पुडिया निकालता है और सरपंच को दे देता है।

चंगेज खान, “ये रात के खाने में मिला कर तुम और तुम्हारा पूरा परिवार खा कर सो जाना, जल्द ही तेरी सारी परेशानी खत्म हो जाएगी।”

सरपंच, “हाँ परेशानी तो खत्म होगी जरूर। अब देख तेरे साथ क्या होता है?”

सरपंच और कुशल वहाँ से चले जाते हैं।

चंगेज खान, “आसिफ, तुम इस सरपंच पर नजर रखो। जैसे ही ये नशीली दवाई खा कर बेहोश हो जाए तो तभी हम इसके घर में अपना हाथ साफ़ कर लेंगे।”

आसिफ, “मालिक मालिक, यह तो सरपंच है। इसके घर में चोरी करना तो मतलब बहुत ही मुश्किल है।”

चंगेज खान, “तू चिंता मत कर। बस मुझे यही मौका मिला है की हम एक बार मोटा हाथ मार कर यहाँ से भाग जायेंगे और फिर कभी दोबारा इस गाँव में नहीं आयेंगे।”

रात को जैसे ही सरपंच और उसके घरवाले खाना खाकर सोते हैं वैसे ही चंगेज खान, सलीम और आसिफ तीनों सरपंच के घर में चोरी करने को जाते हैं।

चंगेज खान, “अरे सलीम! जल्दी जल्दी सारी चीजें बोरी में भर और फिर हम यहाँ से भाग चलते हैं।”

जैसे ही वो कहता है वैसे ही घर की लाइट ऑन हो जाती है। लाइट ऑन होते ही चंगेज खान, सलीम और आसिफ तीनों ही डर जाते हैं।

सलीम, “अरे अरे मालिक! ये लाइट कैसे जल गई?”

वो देखते हैं कि वहाँ पर सभी गाँव वाले खड़े हैं, वो तीनों बहुत डर जाते हैं।

सरपंच, “बेटा, लाइट जली नहीं, हमने जलाई है। तूने क्या सोचा की तू अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा?

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तू यहाँ बैठ कर चोरी करता रहेगा और हम में से किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा।

तेरे से मैंने पहले ही कहा था कि इस गाँव में किसी को कभी धोखा मत देना, नहीं तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा।”

सलीम, “जनाब जनाब, मुझे माफ़ कर दीजिये। मैं तो बस इनके बहकावे में आ गया था। मैं कोई चोर नहीं हूँ।

मैं तो बस थोड़े से पैसे कमाने के लालच में इनके साथ चोरी करने लग गया था। जनाब मुझे माफ़ कर दीजिये।”

कुशल, “माफी तो तुम लोगों को कभी नहीं मिलेगी। अरे गाँव वालों! देख क्या रहे हो? मारो इन तीनों को पकड़ कर।

इन्होंने हमारे गाँव को धोखा दिया है। इन लोगों ने हम सब के साथ गद्दारी की है। मारो इन तीनों को पकड़ कर।”

गाँव वाले गुस्से में चंगेज खान, सलीम और आसिफ को मारते हैं, तभी पुलिस आ जाती है।

पुलिस, “अरे ये तीनों यहाँ पर छिपे हैं? इनको तो पूरे शहर की पुलिस ढूंढ रही है। सरपंच जी, ये बहुत ही बड़ा गुंडा है। यह यहाँ पर आकर छिपा हुआ है। पकड़ लो इन तीनों को।”

सरपंच, “थानेदार साहब, आपका बहुत बहुत शुक्रिया इतनी रात में आने के लिए।”

पुलिस, “अरे सरपंच जी! शुक्रिया तो हमें आपका करना चाहिए की आपकी वजह से इतना बड़ा गुंडा आज पकड़ा गया।”

पुलिस चंगेज खान, सलीम और आसिफ को पकड़ कर जेल में बंद कर देती है। और वो तीनों वहीं जेल में बैठे बैठे रोते हैं।

सलीम, “मालिक, मैंने आपसे पहले ही कहा था की अब बस बहुत हो गया, लेकिन आपको बड़ा हाथ मारना था। देखो अब हो गया न, हो गया न हम जेल में बंद।”

चंगेज खान, “हाय! यह क्या हो गया? मेरी थोड़े से लालच ने हम लोगों को जेल में बंद कर दिया है। कोई बाहर निकालो हमें।”


दोस्तो ये Moral Story आपको कैसी लगी, नीचे Comment में हमें जरूर बताइएगा। कहानी को पूरा पढ़ने के लिए शुक्रिया!


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